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हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है: सीएम सुक्खू

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कहा कि कृषि विभाग ने इस वर्ष एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है

हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है: सीएम सुक्खू
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कहा कि कृषि विभाग ने इस वर्ष एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है और किसानों को इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे किसानों को कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त होता है।

अब तक 222,893 किसान और बागवानी परिवार प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि प्राकृतिक खेती में लगे दो लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण हो चुका है, जिनमें से 198,000 किसानों को प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।

प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत रासायनिक पदार्थों के उपयोग को हतोत्साहित किया जाता है, जबकि स्थानीय गोबर, गोमूत्र और वनस्पति संसाधनों पर आधारित पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है।

इस योजना के प्रमुख उद्देश्यों में पर्यावरण संरक्षण, फसल विविधता को बढ़ावा देना और खेती की लागत को कम करना शामिल है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को उचित प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक रूप से उगाई गई उपज के लिए देश में सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की पेशकश कर रही है।

इस वर्ष प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 60 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम, मक्का का 40 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए, पांगी घाटी से प्राप्त जौ का 60 रुपए से बढ़ाकर 80 रुपए और प्राकृतिक हल्दी का 90 रुपए से बढ़ाकर 150 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।

पांगी उपमंडल को राज्य का पहला पूर्णतः प्राकृतिक कृषि उपमंडल घोषित किया गया है।

अदरक को भी पहली बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे में लाया गया है और इसका मूल्य 30 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, गाय के दूध का क्रय मूल्य बढ़ाकर 61 रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध का क्रय मूल्य 71 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, क्योंकि लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इनमें से 53.95 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यह क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 14.70 प्रतिशत का योगदान देता है।


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