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शिमला में पारंपरिक पैदल चलने की संस्कृति बचाने की पहल, विधानसभा से बिल पास, जुर्माने का प्रावधान

शिमला में ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने और पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने एक सख्त कानून को मंजूरी दे दी है

शिमला में पारंपरिक पैदल चलने की संस्कृति बचाने की पहल, विधानसभा से बिल पास, जुर्माने का प्रावधान
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शिमला। शिमला में ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने और पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने एक सख्त कानून को मंजूरी दे दी है। बुधवार को सदन में 'शिमला रोड यूजर्स एंड पेडेस्ट्रियंस (पब्लिक सेफ्टी एंड कन्वीनियंस) संशोधन विधेयक, 2026' ध्वनिमत से पारित किया गया। इस विधेयक को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया था। चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों ने वॉकआउट कर दिया, जिसके चलते बिल बिना विरोध के पारित हो गया।

नए कानून के तहत अब शिमला की सील्ड सड़कों पर बिना परमिट वाहन चलाने पर 15,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। वहीं, प्रतिबंधित सड़कों पर बिना अनुमति प्रवेश करने पर 5,000 रुपए और परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने पर 2,000 रुपए का जुर्माना तय किया गया है।

सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य शिमला की पारंपरिक पैदल चलने की संस्कृति को संरक्षित करना है, जहां मॉल रोड और रिज जैसे इलाके लंबे समय से केवल पैदल यात्रियों के लिए जाने जाते रहे हैं। नए नियमों के तहत नवबहार से रिज, छोटा शिमला से मॉल और रिज, आईजीएमसी से रिज, एजी ऑफिस से सीटीओ और बौलियुगंज से एडवांस स्टडी होते हुए विधानसभा मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों को सील्ड और प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया गया है।

इसके अलावा परमिट शुल्क में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। अब वार्षिक परमिट फीस 2,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए कर दी गई है, जबकि दैनिक शुल्क 200 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए कर दिया गया है। प्रोसेसिंग फीस भी 100 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए कर दी गई है।

प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। अब प्रतिबंधित सड़कों के लिए परमिट जारी करने का अधिकार उपायुक्त से लेकर गृह सचिव को दे दिया गया है। साथ ही अधिकृत पुलिसकर्मियों को मौके पर ही जुर्माने का 50 प्रतिशत तक वसूल कर मामले का निपटारा करने की शक्ति भी दी गई है।

यह फैसला उच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों के बाद लिया गया है, जिनमें कहा गया था कि बढ़ती वाहनों की संख्या के कारण शिमला अपनी पारंपरिक पैदल संस्कृति खो रहा है। सरकार का मानना है कि इस कानून से ट्रैफिक का दबाव कम होगा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी और शहर की विरासत को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी।


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