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हिमाचल बजट 2026-27: वित्तीय संकट के बीच सख्त फैसले, CM सुक्खू ने वेतन का हिस्सा छह माह तक स्थगित किया

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कई सख्त और असामान्य फैसलों की घोषणा की। इनमें सबसे अहम फैसला मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित करना है।

हिमाचल बजट 2026-27: वित्तीय संकट के बीच सख्त फैसले, CM सुक्खू ने वेतन का हिस्सा छह माह तक स्थगित किया
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शिमला : Himachal Budget 2026-27: हिमाचल प्रदेश की कमजोर वित्तीय स्थिति का असर इस बार राज्य के बजट में साफ तौर पर देखने को मिला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कई सख्त और असामान्य फैसलों की घोषणा की। इनमें सबसे अहम फैसला मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा छह महीने के लिए स्थगित करना है। मुख्यमंत्री ने इस कदम की शुरुआत खुद से करने की बात कही और इसे राज्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी बताया।

वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में अस्थायी कटौती

बजट में घोषित प्रावधानों के अनुसार, वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के वेतन का एक बड़ा हिस्सा अस्थायी रूप से रोका जाएगा

  • मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव: 30% वेतन स्थगित
  • सचिव और विभागाध्यक्ष: 20% वेतन स्थगित
  • डीजीपी और एडीजीपी: 30% वेतन स्थगित
  • आईजी, डीआईजी, एसएसपी और एसपी स्तर: 20% वेतन स्थगित
  • प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) और अतिरिक्त PCCF: 30% वेतन स्थगित
  • सीसीएफ, सीएफ और डीएफओ: 20% वेतन स्थगित
  • इसके अलावा, ग्रुप A और ग्रुप B अधिकारियों के वेतन का 3 प्रतिशत हिस्सा भी छह माह के लिए स्थगित रहेगा।
हालांकि, सरकार ने ग्रुप C और ग्रुप D कर्मचारियों को इस निर्णय से बाहर रखा है। उन्हें पूरा वेतन मिलता रहेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे ही राज्य की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, स्थगित वेतन जारी कर दिया जाएगा।

घटाया गया बजट आकार, संसाधनों की कमी साफ

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का कुल बजट आकार 54,928 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले साल की तुलना में 3,586 करोड़ रुपये कम है। यह कटौती राज्य की सीमित वित्तीय क्षमता और केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने का सीधा असर मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का जिक्र करते हुए कहा कि आरडीजी बंद होने से राज्य को आने वाले समय में गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गरीबों पर फोकस

आर्थिक दबाव के बावजूद सरकार ने ग्रामीण विकास और कमजोर वर्गों के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • दूध और प्राकृतिक खेती उत्पादों के MSP में वृद्धि
  • ‘मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना’ की शुरुआत
इस नई योजना के तहत एक लाख अति गरीब परिवारों को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली, पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह सम्मान निधि दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है।

विधानसभा में हंगामा

बजट सत्र के दौरान विधानसभा में राजनीतिक माहौल भी गर्म रहा। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों से की-
"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।"

हालांकि, भाषण के दौरान एक शब्द के प्रयोग पर विपक्ष ने आपत्ति जताई, जिसके चलते सदन में हंगामा हुआ और करीब 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने विवादित शब्द को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। बताया जा रहा है कि हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार है जब बजट भाषण के दौरान इस तरह का व्यवधान देखने को मिला।

लंबा बजट भाषण और बीच में ब्रेक

मुख्यमंत्री सुक्खू का बजट भाषण कुल 4 घंटे 9 मिनट 33 सेकंड तक चला। 134 पन्नों के इस विस्तृत भाषण के दौरान उन्होंने कई बार शायरी का सहारा लेकर माहौल को हल्का करने की कोशिश की। दिलचस्प बात यह रही कि बजट के बीच में पहली बार मुख्यमंत्री को ब्रेक लेना पड़ा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की गई।

आत्मनिर्भर हिमाचल का संकल्प

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद सरकार विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

गंभीर वित्तीय चुनौतियां

हिमाचल प्रदेश का यह बजट स्पष्ट रूप से दिखाता है कि राज्य गंभीर वित्तीय चुनौतियों से गुजर रहा है। एक ओर जहां सरकार को खर्चों में कटौती और वेतन स्थगन जैसे कड़े कदम उठाने पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब और ग्रामीण वर्ग को राहत देने की कोशिश भी जारी है। अब यह देखना अहम होगा कि ये फैसले राज्य की आर्थिक स्थिति को कितना संभाल पाते हैं और क्या हिमाचल आने वाले वर्षों में अपने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर बढ़ पाता है।


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