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हिमाचल : मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक का लोकार्पण किया

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मण्डी में आयोजित कार्यक्रम में शिमला से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया

हिमाचल : मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक का लोकार्पण किया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मण्डी में आयोजित कार्यक्रम में शिमला से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मण्डी स्थित इन्दिरा मार्केट में 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित शहीद स्मारक का लोकार्पण किया। यह शहीद स्मारक 1962, 1965, 1971 तथा 1999 में कारगिल शहीदों को समर्पित किया गया है। इस युद्ध स्मारक पर सभी शहीदों के नाम अंकित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस शहीद स्मारक के चरण-2 का कार्य भी शुरू किया जाएगा।

जय राम ठाकुर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह दिन उन शहीदों के प्रति समर्पित है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत नेतृत्व में भारत के सैनिकों ने कारगिल में पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का करारा जवाब दिया। 26 जुलाई का दिन हर वर्ष सम्पूर्ण देश में कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का इतिहास अपने सैनिकों के पराक्रम, वीरता, शौर्य और बलिदानों के लिए जाना जाता है। कारगिल संघर्ष में देश के वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। ऑपरेशन विजय में हिमाचल के वीर जवानों ने अपना शौर्य प्रदर्शित किया और इसके दौरान प्रदेश के 52 बहादुर सैनिक शहीद हुए।

आज तक प्रदेश के 1096 वीर सपूत वीरता पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। प्रदेश के 1246 वीर सपूतों ने अपनी मातृ भूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। स्वतंत्र भारत का पहला सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले मेजर सोमनाथ शर्मा हिमाचल के ही थे। कारगिल युद्ध में हिमाचल प्रदेश के शहीद कैप्टन विक्रम बत्तरा को मरोणोपरान्त और राइफल मैन संजय कुमार को परमवीर चक्र प्राप्त हुआ।

जय राम ठाकुर ने कहा कि कारगिल युद्ध में 52 शहीद सैनिकों के परिजनों को पांच-पांच लाख की वित्तीय सहायता के अतिरिक्त 44 शहीदों के परिवारों में से एक-एक आश्रित को सरकारी रोजगार प्रदान किया गया है। इस युद्ध में अपंग हुए सैनिकों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है तथा नौ अपंग हुए सैनिकों को रोजगार उपलब्ध करवाया गया है।


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