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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सरकार ने दिया निजीकरण का लाइसेंस रद्द करने का आश्वासन

हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन शुक्रवार शाम को खत्म हो गई। गुरुग्राम-नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ कर्मचारी गुरुवार से हड़ताल पर थे।

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, सरकार ने दिया निजीकरण का लाइसेंस रद्द करने का आश्वासन
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पंचकूला। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन शुक्रवार शाम को खत्म हो गई। गुरुग्राम-नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ कर्मचारी गुरुवार से हड़ताल पर थे।

शुक्रवार शाम पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ दूसरे दौर की बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। सरकार ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द किया जाएगा। बिजली मंत्री अनिल विज ने यूनियन नेताओं को बताया कि सरकार बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत कार्रवाई करेगी।

दरअसल, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने गुरुग्राम-नूंह क्षेत्र में बिजली वितरण के लिए एक निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला किया था। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इसे बिजली क्षेत्र के निजीकरण की शुरुआत बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया।

इस मुद्दे पर पंचकूला में मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली विभाग कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। यह बैठक दो चरणों में हुई। बैठक के बाद बिजली मंत्री अनिल विज ने कहा, "हरियाणा में एचईआरसी ने एक निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला किया। हमने पहले दिन से ही नियामक के सामने इसका कड़ा विरोध किया है। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार ने किसी से भी कोई आवेदन नहीं मांगा था।"

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के विद्युत अधिनियम में एक प्रावधान है, जिसके तहत कोई भी संस्था नियामक को आवेदन देकर कुछ खास इलाकों के निजीकरण का प्रस्ताव रख सकती है। जैसे ही इस फैसले की घोषणा हुई, बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इसका पुरजोर विरोध किया।

मंत्री अनिल विज ने कहा कि यूनियन नेताओं के साथ चर्चा के बाद यह फैसला किया गया है कि विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत सरकार के पास एचईआरसी को निर्देश देने का अधिकार है। अगर यह फैसला तय नीति से अलग है, तो सरकार इसे रोकने और रद्द करने का निर्देश दे सकती है।

विज ने कहा, "हमने इसी रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री और मैंने जरूरी पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और विभाग को सौंप दिए हैं, जिसमें इस आदेश को तुरंत रोकने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही हम उसी प्रावधान के तहत इस आदेश की समीक्षा के लिए भी आवेदन दाखिल करेंगे।" उन्होंने बताया कि आज की बैठक बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और 3 नवंबर को दोपहर 3 बजे एक और बैठक बुलाई गई है, जिसमें अब तक हुई प्रगति के बारे में बिंदुवार और विस्तृत जानकारी दी जाएगी।



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