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हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस की सख्ती, पांच विधायक निलंबित
इस फैसले पर अंतिम मुहर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगाई। हरियाणा कांग्रेस कमेटी, कांग्रेस विधायक दल और पार्टी की राष्ट्रीय अनुशासन समिति की सिफारिशों के बाद यह कदम उठाया गया। पार्टी नेतृत्व का साफ संदेश है कि संगठन के भीतर अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

चंडीगढ़ : हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद उठे क्रॉस वोटिंग के मुद्दे पर कांग्रेस ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। पार्टी ने अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए अपने पांच विधायकों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई चुनाव के करीब एक महीने बाद की गई है, जिसे कांग्रेस संगठन में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
खड़गे ने लगाई अंतिम मुहर
इस फैसले पर अंतिम मुहर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लगाई। हरियाणा कांग्रेस कमेटी, कांग्रेस विधायक दल और पार्टी की राष्ट्रीय अनुशासन समिति की सिफारिशों के बाद यह कदम उठाया गया। पार्टी नेतृत्व का साफ संदेश है कि संगठन के भीतर अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कर्मवीर बौद्ध के खिलाफ किया मतदान
निलंबित किए गए विधायकों में नारायणगढ़ से शैली चौधरी, सढ़ोरा से रेणु बाला, फिरोजपुर झिरका से मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल और रतिया से सरदार जरनैल सिंह शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के खिलाफ मतदान किया था। इस कथित क्रॉस वोटिंग ने पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाया और संगठन के भीतर असंतोष को उजागर किया।
सदस्यता पर नहीं पड़ेगा असर
हालांकि, कांग्रेस की इस कार्रवाई का तत्काल असर इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता पर नहीं पड़ेगा। संवैधानिक प्रावधानों के तहत पार्टी से निलंबन और विधायक पद अलग-अलग माने जाते हैं। इसका मतलब यह है कि पांचों विधायक अभी भी हरियाणा विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे और सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे।
अगला कदम उठाने की तैयारी
अब कांग्रेस इन विधायकों के खिलाफ अगला कदम उठाने की तैयारी में है। पार्टी जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर करेगी, जिसमें इनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी। इस मामले में अंतिम निर्णय स्पीकर के हाथ में होगा। स्पीकर यह तय करेंगे कि क्रॉस वोटिंग के आरोप कितने ठोस हैं और क्या इसके आधार पर विधायकों की सदस्यता रद्द की जा सकती है।
इस पूरे मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप लागू नहीं होता। यही कारण है कि तत्काल दल-बदल कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के तहत इन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई संभव नहीं हो पाई। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में विधानसभा के भीतर किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्हिप जारी होता है, तो इन विधायकों के लिए उसका पालन करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कड़ी संवैधानिक कार्रवाई हो सकती है।
हुड्डा ने इस फैसले का समर्थन किया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था। वहीं, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने भी स्पष्ट कर दिया कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
भविष्य को लेकर अटकलें
निलंबन के बाद इन विधायकों की स्थिति पार्टी के भीतर कमजोर हो गई है। उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों, बैठकों और निर्णय प्रक्रिया से दूर कर दिया गया है। इससे उनके राजनीतिक प्रभाव में भी कमी आने की संभावना है। इस बीच, इन विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने की चर्चाओं ने उनके भविष्य को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।
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