Top
Begin typing your search above and press return to search.

नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की पहचान के लिए गुजरात की एनएफएसयू ने भेजी 10 सदस्यीय फोरेंसिक टीम

गुजरात की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) की 10 सदस्यीय टीम नेपाल रवाना हो गई है

नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की पहचान के लिए गुजरात की एनएफएसयू ने भेजी 10 सदस्यीय फोरेंसिक टीम
X

गांधीनगर। गुजरात की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) की 10 सदस्यीय टीम नेपाल रवाना हो गई है। यह टीम नेपाल बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान करने में मदद करेगी। इस आपदा के बाद भारत सहित कई देशों के परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

यह टीम एनएफएसयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डीएनए फोरेंसिक्स के प्रमुख भार्गव पटेल के नेतृत्व में काम करेगी। टीम आपदा पीड़ितों की पहचान की प्रक्रिया के तहत डीएनए नमूनों का मिलान करेगी।

यह मिशन भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की संयुक्त निगरानी में संचालित किया जाएगा।

नेपाल में 26 अगस्त को मध्य नेपाल और नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़े स्तर पर खोज और राहत अभियान चलाया जा रहा है। शनिवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 669 हो गई, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को हुए नुकसान के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयां आ रही हैं।

इस आपदा से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने 28 अगस्त की अपनी ब्रीफिंग में कहा था कि बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास लगातार जारी हैं।

गुजरात से जुड़े 25 लोगों के लापता होने की सूचना है, जिनमें कुछ विदेशी नागरिकता रखने वाले लोग भी शामिल हैं।

मृतकों की पहचान करना राहत कार्यों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है, क्योंकि कई परिवार अभी भी अपने लापता रिश्तेदारों के बारे में पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं।

नेपाल के अधिकारी बचाए गए और लापता लोगों की सूची तैयार कर रहे हैं, जबकि प्रभावित जिलों में पहचान और शव बरामदगी का काम लगातार जारी है।

एनएफएसयू ने कहा, "पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीम लापता लोगों के परिवारों को उनके परिजनों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराएगी। विशेषज्ञ बरामद शवों से डीएनए नमूने लेकर उन्हें परिजनों के नमूनों से मिलाएंगे और तय प्रक्रिया के अनुसार पहचान सुनिश्चित करेंगे।"

विश्वविद्यालय ने बताया कि उसे इस तरह के कार्यों का अनुभव है। पिछले वर्ष 12 जून को हुए एआई-171 विमान हादसे के बाद मृतकों की डीएनए पहचान केवल 10 दिनों में पूरी कर ली गई थी।

एनएफएसयू ने यह भी बताया कि उसके फोरेंसिक विशेषज्ञ अमेरिका के रक्षा विभाग के साथ मिलकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में लापता हुए अमेरिकी सैनिकों का पता लगाने के काम में भी सहयोग कर चुके हैं। इस प्रयास के तहत तीन सैनिकों के अवशेष बरामद किए गए थे।

विश्वविद्यालय के पास मानव पहचान और आपदा पीड़ित पहचान के क्षेत्र में विशेष शैक्षणिक और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it