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गुजरात: भाजपा अध्यक्ष ने विकास, आदिवासी कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में कांग्रेस को 'शून्य' बताया

गुजरात भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने गुरुवार को दाहोद में बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित किया

गुजरात: भाजपा अध्यक्ष ने विकास, आदिवासी कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में कांग्रेस को शून्य बताया
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दाहोद। गुजरात भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने गुरुवार को दाहोद में बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर विकास, आदिवासी कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में 'शून्य' योगदान देने का आरोप लगाया और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं से जनसंपर्क बढ़ाने का आग्रह किया।

सभा को संबोधित करते हुए विश्वकर्मा ने कहा कि कांग्रेस का मतलब विकास के नाम पर शून्य, आदिवासियों को सहायता देने के नाम पर शून्य, और शिक्षा के नाम पर शून्य है। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी झूठे वादों और झूठ का प्रतिनिधित्व करती है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी भी गांवों और आदिवासी समुदायों के लोगों को शिक्षित और प्रगतिशील नहीं बनाना चाहा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल चुनाव के दौरान ही दिखाई देती है। देश की जनता ने कांग्रेस को तीन बार नकारा है, और गुजरात की जनता इसे 30 वर्षों से नकार रही है।

दाहोद विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में कई पार्टी नेता और पदाधिकारी उपस्थित थे।

विश्वकर्मा ने कहा कि भाजपा की संगठनात्मक शक्ति सत्ता के बजाय सेवा के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं पर टिकी है, और उन्होंने आगामी स्थानीय स्वशासन चुनावों की तैयारी करते हुए उनसे पार्टी की 'राष्ट्रवादी विचारधारा' और सरकारी पहलों को हर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।

आदिवासी आबादी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय ही जल, भूमि और जंगलों का सच्चा संरक्षक और प्रकृति का रक्षक है, और देश की रक्षा में किए गए बलिदानों और स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी सहित उनके ऐतिहासिक योगदानों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने आदिवासी नेताओं की विरासत का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता।

विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीति को वोट बैंक, जाति-आधारित और क्षेत्रीय विचारों से दूर करके विकास की ओर मोड़ने का श्रेय दिया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पदभार ग्रहण करने के 17 दिनों के भीतर ही नर्मदा बांध से संबंधित मंजूरी सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय तेजी से लिए, और गुजरात के शहरों और गांवों में दिखाई देने वाला विकास उनके इसी नेतृत्व का प्रतिबिंब है।

दाहोद में हुए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जहां पहले निवासी मजदूरी के लिए पलायन करते थे, वहीं अब स्थानीय रोजगार सृजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।


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