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बच्चों के कल्याण के लिए सामाजिक संगठनों के साथ और मजबूत तालमेल को सरकार तैयार: मंत्री बावलिया

गुजरात के गांधीनगर में 'बाल अधिकार: मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर आयोजित एक राज्य-स्तरीय कार्यशाला में बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच एक संयुक्त दृष्टिकोण पर जोर दिया गया।

बच्चों के कल्याण के लिए सामाजिक संगठनों के साथ और मजबूत तालमेल को सरकार तैयार: मंत्री बावलिया
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गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर में 'बाल अधिकार: मुद्दे और चुनौतियां' विषय पर आयोजित एक राज्य-स्तरीय कार्यशाला में बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच एक संयुक्त दृष्टिकोण पर जोर दिया गया।

गुजरात के श्रम, कौशल विकास, रोजगार और ग्रामीण विकास मंत्री कुंवरजी बावलिया ने गुरुवार को कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि बाल सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग बेहद सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के पालन-पोषण और सुरक्षा की जिम्मेदारी सामूहिक है। जिस तरह एक कुम्हार मिट्टी को आकार देकर बर्तन बनाता है, उसी तरह समाज भी देखभाल, मूल्यों और सुरक्षा के जरिए बच्चों के जीवन को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है।

यह कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और गांधीनगर नगर निगम द्वारा संयुक्त रूप से गांधीनगर के वन प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया गया था।

इसमें स्वयंसेवी संगठनों, नागरिक समाज समूहों और एनजीओ के प्रतिनिधि एक साथ आए, जहां विषय विशेषज्ञों ने बाल अधिकारों और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए। गांधीनगर की मेयर मीराबेन पटेल भी इस कार्यक्रम में शामिल हुईं।

मंत्री बावलिया ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कल्याणकारी योजनाएं समाज के सभी वर्गों के बच्चों तक पहुंचें, जिनमें मजदूर परिवारों और कमजोर पृष्ठभूमि वाले बच्चे भी शामिल हैं।

मंत्री ने कहा कि उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि मजदूरों और उनके परिवारों को त्वरित सहायता और शिकायत निवारण उपलब्ध कराने के लिए 'श्रम सेतु पोर्टल' और 'श्रमिक सहायक कॉल सेंटर' जैसी डिजिटल पहलें शुरू की गई हैं। बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए लगातार जागरूकता फैलाना जरूरी है।

उन्होंने बाल सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए जिला-स्तरीय जनसंपर्क गतिविधियां आयोजित करने में बाल अधिकार आयोग के प्रयासों की सराहना की।

मंत्री ने कहा कि सरकारी निकायों और सामाजिक संगठनों के बीच तालमेल को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि बच्चों के कल्याण से जुड़े उपायों को लागू करने में कोई कमी न रह जाए।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठा गज्जर ने कहा कि बच्चे समाज की नींव होते हैं और राष्ट्र-निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। बच्चों के अधिकारों, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुरक्षा के लिए सभी संबंधित पक्षों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए काम करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस दौरान उन्‍होंने बाल श्रम तथा बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियानों का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

धर्मिष्ठा गज्जर ने यह भी बताया कि आयोग स्कूलों और आंगनबाड़ियों जैसी संस्थाओं की निगरानी में सक्रिय रूप से लगा हुआ है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में आयोग ने विभिन्न जिलों का दौरा किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर बच्चों तक पहुंचें और उनकी चिंताओं का समाधान किया जा सके।

इस कार्यशाला में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा में आने वाली मौजूदा चुनौतियों की पहचान करने और कार्यान्वयन के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों के सर्वोत्तम अनुभवों को साझा करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

प्रतिभागियों ने बच्चों के कल्याण से जुड़ी पहलों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एनजीओ और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की।

इस कार्यक्रम के दौरान अहमदाबाद की माही भट्ट को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।


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