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सीएम पटेल ने गुजरात विधानसभा में 'भीष्म क्यूब-आर300' के प्रदर्शन का उद्घाटन किया

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 'भीष्म क्यूब-आर300' के एक खास डेमो का उद्घाटन किया। यह एक पोर्टेबल मोबाइल इमरजेंसी हॉस्पिटल है, जिसे आपदाओं और मुश्किल आपातकालीन स्थितियों के दौरान कुछ ही मिनटों में ट्रॉमा केयर और दूसरी जरूरी मेडिकल सेवाएं देने के लिए डिजाइन किया गया है।

सीएम पटेल ने गुजरात विधानसभा में भीष्म क्यूब-आर300 के प्रदर्शन का उद्घाटन किया
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गांधीनगर। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को 'भीष्म क्यूब-आर300' के एक खास डेमो का उद्घाटन किया। यह एक पोर्टेबल मोबाइल इमरजेंसी हॉस्पिटल है, जिसे आपदाओं और मुश्किल आपातकालीन स्थितियों के दौरान कुछ ही मिनटों में ट्रॉमा केयर और दूसरी जरूरी मेडिकल सेवाएं देने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह प्रदर्शन गुजरात विधानसभा में किया गया। इसमें विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया, मंत्रिपरिषद के सदस्य और विधायक शामिल हुए।

नेताओं ने इमरजेंसी मेडिकल सिस्टम पर एक शॉर्ट फिल्म भी देखी। भीष्म क्यूब-आर300 को केंद्र सरकार के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (एनएससीएस) के मार्गदर्शन में 'आरोग्य मैत्री' पहल के तहत विकसित किया गया है।

पानशेरिया के अनुसार, 9 और 10 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को संकट और प्राकृतिक आपदाओं के समय इमरजेंसी हेल्थकेयर व्यवस्थाओं से परिचित कराना है। इसमें टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड लॉजिस्टिक्स और मजबूत हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी चीजें शामिल हैं।

सिस्टम के बारे में बताते हुए पानशेरिया ने कहा, "भीष्म क्यूब-आर300 को बहुत जटिल या इमरजेंसी स्थितियों में कुछ ही मिनटों में तैनात किया जा सकता है। यह मौके पर ही ट्रॉमा केयर, इमरजेंसी सर्जरी, डायग्नोस्टिक सेवाएं और जीवन बचाने वाले अन्य इलाज मुहैया करा सकता है।"

पूरा सिस्टम 72 मॉड्यूलर मिनी-क्यूब्स में पैक होता है। हर क्यूब का वजन 20 किलोग्राम से कम है और इसे 12 मिनट से भी कम समय में असेंबल किया जा सकता है।

यह एक साथ लगभग 300 घायल लोगों को इमरजेंसी इलाज दे सकता है। इस सिस्टम को सड़क, हवा या समुद्र के रास्ते ले जाया जा सकता है और दूर-दराज के इलाकों में एयर-ड्रॉप भी किया जा सकता है।

पानशेरिया ने इस पोर्टेबल अस्पताल को आपदा की तैयारी की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। इस सिस्टम में वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, एक मिनी-लैबोरेटरी और सर्जिकल उपकरण जैसी लगभग 400 मेडिकल चीजें शामिल हैं।

इसमें घटना स्थल पर ही तुरंत 'डैमेज कंट्रोल सर्जरी' करने की सुविधा भी है।

इस यूनिट में बिजली बनाने और ऑक्सीजन सप्लाई के अपने सिस्टम हैं, जिससे यह इमरजेंसी के दौरान स्वतंत्र रूप से काम कर सकती है।

पानशेरिया ने कहा, "केंद्र सरकार ने मानवीय संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मदद के लिए यूक्रेन, मालदीव, जमैका, वेनेजुएला और श्रीलंका जैसे देशों में ये क्यूब्स भेजे थे।"

उन्होंने कहा कि गुजरात की लंबी तटरेखा, औद्योगिक क्षेत्रों और चक्रवात, बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को देखते हुए राज्य के लिए इमरजेंसी मेडिकल तैयारी बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भीष्म क्यूब की तैनाती से आपदा के समय प्रतिक्रिया देने की क्षमता मजबूत हो सकती है। इस प्रदर्शन में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) और राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

मौजूद लोगों में अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव टोपनो, स्वास्थ्य आयुक्त (शहरी) डॉ. संध्या भुल्लर और स्वास्थ्य आयुक्त (ग्रामीण) डॉ. रतनकंवर गढ़वी चरण शामिल थे। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।


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