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2 दिन में 4 NEET छात्रों ने दी जान, गुजरात और तमिलनाडु में छात्रों ने किया सुसाइड

पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से NEET अभ्यर्थियों की मौत के कई मामले सामने आए हैं। इससे पहले देहरादून की 23 वर्षीय रिया थापा और लखनऊ की 17 वर्षीय छात्रा की मृत्यु की खबर सामने आई थी।

2 दिन में 4 NEET छात्रों ने दी जान, गुजरात और तमिलनाडु में छात्रों ने किया सुसाइड
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नई दिल्ली: तमिलनाडु के कोयंबटूर में NEET-UG की तैयारी कर रही 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना की बुधवार को मृत्यु हो गई। परिवार के अनुसार, वह परीक्षा रद्द होने और दोबारा होने वाली परीक्षा को लेकर तनाव में थी। घटना से पहले उसने अपने कुछ करीबी रिश्तेदारों और चाचा को संदेश भेजकर अपनी चिंता और भविष्य को लेकर डर का जिक्र किया था। परिजनों का कहना है कि छात्रा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का इंतजार कर रही थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उसे फिर से परीक्षा देने को लेकर काफी चिंता होने लगी थी। वह इस बात से भी परेशान थी कि उसके पिता ने उसकी पढ़ाई पर काफी खर्च किया है और वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाएगी।

गुजरात का छात्र छठी मंजिल से कूदा

वहीं, अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके में बुधवार रात करीब 2:30 बजे 17 साल के छात्र ने आनंदम फ्लैट्स के ब्लॉक बी की छठी मंजिल से छलांग लगा दी। पुलिस जांच में पता चला कि छात्र NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। आत्महत्या का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।

रिश्तेदारों के पहुंचने के बाद अस्पताल ले जाया गया

अनुकीर्तना कोयंबटूर के कोवईपुदुर स्थित पार्क टाउन इलाके की रहने वाली थी। उसके पिता सेंथिल प्रभु सीआईटीयू से संबद्ध TASMAC ट्रेड यूनियन के जिला सचिव हैं। दो बहनों में वह बड़ी थी और उसने एट्टिमडई के एक निजी स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी। परिवार के अनुसार, डॉक्टर बनना और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना उसका सपना था। परीक्षा रद्द होने और 21 जून को प्रस्तावित पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद वह मानसिक रूप से काफी दबाव में थी। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

परिवार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने कुछ समय तक शव लेने से इनकार किया और परीक्षा प्रबंधन को लेकर नाराजगी जताई। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत के बाद उन्होंने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। परिवार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करते हुए NEET व्यवस्था की समीक्षा और परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग उठाई। पुलिस ने छात्रा का मोबाइल फोन जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

दो दिनों में सामने आए कई मामले

पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से NEET अभ्यर्थियों की मौत के कई मामले सामने आए हैं। इससे पहले देहरादून की 23 वर्षीय रिया थापा और लखनऊ की 17 वर्षीय छात्रा की मृत्यु की खबर सामने आई थी। 12 मई को NEET परीक्षा रद्द होने के बाद देश भर में अब तक लगभग 12 स्टूडेंट्स जान दे चुके हैं। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली, छात्रों पर बढ़ते दबाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द हुई थी परीक्षा

NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 23 लाख छात्रों ने भाग लिया था। परीक्षा के बाद कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ उम्मीदवारों को पहले से पेपर मिलने के आरोप सामने आए। जांच एजेंसियों द्वारा प्रारंभिक स्तर पर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ समीक्षा के बाद पुनर्परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है NEET

NEET यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट भारत में मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली प्रमुख परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के जरिए देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष और नर्सिंग समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला मिलता है। AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी इसी परीक्षा के माध्यम से प्रवेश देते हैं। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता

हालिया घटनाओं के बाद शिक्षा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों ने परीक्षा से जुड़े तनाव, अपेक्षाओं के दबाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौरान छात्रों को भावनात्मक सहयोग, उचित परामर्श और परिवार के सकारात्मक समर्थन की आवश्यकता होती है, ताकि वे दबाव का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।


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