गोल्ड लोन कंपनियों से मांगा फुटेज, लेन-देन की जानकारी
कोरबा ! सराफा शो रूम के कैशियर द्वारा अमानत में खयानत कर जेवरातों को गिरवी रखने और इसे इस कार्य में सहयोगी एक सराफा व्यवसायी को जेल दाखिल करा दिया गया है।

अमानत में खयानत के आरोपी जेल दाखिल
कोरबा ! सराफा शो रूम के कैशियर द्वारा अमानत में खयानत कर जेवरातों को गिरवी रखने और इसे इस कार्य में सहयोगी एक सराफा व्यवसायी को जेल दाखिल करा दिया गया है। दो आरोपियों को जेल दाखिल कराने के बाद पुलिस द्वारा सोना फायनेंस कंपनियों के सीसीटीवी के फुटेज और लेन-देन करने के नियम कायदा के संबंध में आवश्यक जानकारी मांगी गई है। फायनेंस कंपनियों को नोटिस देकर उनसे आवश्यक पूछताछ भी की जा रही है।
पावर हाउस मार्ग में संचालित सराफा शो रूम अनूपचंद तिलोकचंद ज्वेलर्स के संचालक ने जेवरातों के रिकार्ड में जांच के दौरान कुछ जेवरात कम पाये थे। इसका पता चलने के बाद शक की सुई कैशियर कृतेश अग्रवाल पर घूमी तो उसने जल्द ही अपने पास मौजूद जेवरात वापस लौटाने की बात कही। मोहलत के बाद भी जेवरात नहीं लौटाने पर संचालक ने शिकायत कोतवाली में दर्ज कराई। पुलिस ने कैशियर कृतेश अग्रवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तब उसने एक अन्य सराफ व्यवसायी सुनील सोनी के साथ मिलकर जेवरातों को सोना गिरवी रखकर कर्ज देने वाली फायनेंस कंपनी मुथुट गोल्ड लोन, मणप्पुरम और आईआईएफएल गोल्ड लोन फायनेंस से करीब 19 लाख रूपये कर्ज लेना बताया। पुलिस ने इन फायनेंस कंपनियों से लगभग 22 लाख कीमती जेवरात बरामद कर दिया जबकि कृतेश ने शो रूम से करीब 40 लाख के जेवर चोरी किया है। कोतवाली पुलिस ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से पूरा माल बरामद कर आज न्यायालय में पेश करते हुए इन्हें जेल दाखिल करा दिया गया। इस प्रकरण में शो रूम के कर्मचारी भानू प्रताप राठौर, आयुष सिंह व दो अन्य की भी भूमिका पुलिस द्वारा तलाशी जा रही है क्योंकि इनके पहचान पत्र के आधार पर भी सोना गिरवी रखा गया था।
मांगी गई है जानकारी
इस प्रकरण में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया लेकिन चार अन्य संदेहियों पर नजर रखी जा रही है। मामले में इन संदेहियों की भूमिका का पता लगाने तीनों गोल्ड लोन कंपनियों से एक माह पूर्व के सीसीटीवी फुटेज पुलिस ने मांगे हैं। कृतेश और सुनील सोनी के साथ फायनेंस कंपनियों में एटी शो रूम के कौन-कौन कर्मी कब-कब गये थे, यह फुटेज से स्पष्ट होगा। इसके अलावा इन कंपनियों द्वारा सोना रखकर कर्ज देने के नियम-कायदों की भी विस्तृत जानकारी तलब की गई है। कंपनियों के द्वारा बिना बिल अथवा दस्तावेज लिये सोना गिरवी रखकर कर्ज दिया जा रहा है तो इसके लिए किस तरह की अनुमति अथवा लेन देन की वैधानिक स्वीकृति किस स्तर से प्राप्त हुई है, इसकी जानकारी मांगी गई है।
चोरी का सामान रखने की मंशा नहीं
दूसरी ओर इन फायनेंस कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि सोना गिरवी रखने के लिए बिल या दस्तावेज की आवश्यकता नहीं रहती। हमारी कोर्ई मंशा नहीं होती है कि चोरी का सामान गिरवी रखें लेकिन बिल अथवा दस्तावेज की जरूरत नहीं होने का फायदा इस तरह के लोग उठा लेते हैं।
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