गोवा में AAP-GFP का ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन, BJP-कांग्रेस को चुनौती देने की तैयारी; क्या बदलेंगे 2027 के समीकरण?
गठबंधन की घोषणा के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गोवा की जनता बदलाव चाहती है और ‘गोवा फर्स्ट’ सरकार बनाएगा। उन्होंने कहा, “हम अपने दम पर जीतेंगे।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में GFP अध्यक्ष विजय सरदेसाई, दिल्ली की विपक्ष की नेता और AAP की गोवा डेस्क प्रभारी आतिशी समेत अन्य नेता मौजूद रहे।

पणजी: गोवा की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नया सियासी समीकरण बन गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने मिलकर ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन बनाने का ऐलान किया है। दोनों दलों ने इसे गोवा की जनता को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के मुकाबले एक ‘वास्तविक, भरोसेमंद और स्थिर विकल्प’ देने की कोशिश बताया है। AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के गोवा दौरे के दौरान गठबंधन की घोषणा की गई। गोवा विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं और अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता की तस्वीर एक बार फिर बहुकोणीय मुकाबले से तय होने की संभावना है। ऐसे में AAP और GFP का साथ आना छोटे दलों की भूमिका को महत्वपूर्ण बना सकता है।
केजरीवाल बोले- ‘गोवा फर्स्ट सरकार बनाएगा’
गठबंधन की घोषणा के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गोवा की जनता बदलाव चाहती है और ‘गोवा फर्स्ट’ सरकार बनाएगा। उन्होंने कहा, “हम अपने दम पर जीतेंगे।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में GFP अध्यक्ष विजय सरदेसाई, दिल्ली की विपक्ष की नेता और AAP की गोवा डेस्क प्रभारी आतिशी समेत अन्य नेता मौजूद रहे। केजरीवाल ने गठबंधन को ईमानदार और भरोसेमंद बताते हुए कहा कि दोनों पार्टियां इसमें बराबर की साझेदार हैं। उनके मुताबिक यह गठबंधन गोवा की जनता के प्रति वफादार रहेगा और ऐसी राजनीति का विकल्प पेश करेगा, जिसमें चुनाव जीतने के बाद दल-बदल की घटनाएं न हों। उन्होंने BJP और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले चुनावों के बाद गोवा की राजनीति में बड़े पैमाने पर दल-बदल देखने को मिला। केजरीवाल ने गुजरात के एक उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि AAP के एक विधायक के इस्तीफे के बाद हुए चुनाव में पार्टी ने BJP को हरा दिया।
विजय सरदेसाई ने गठबंधन के दरवाजे खुले रखे
GFP अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने कहा कि ‘गोवा फर्स्ट’ के दरवाजे समान विचारधारा वाली राजनीतिक ताकतों के लिए खुले हैं। उन्होंने दावा किया कि कई लोगों ने गठबंधन से संपर्क किया है। इनमें ऐसे नेता भी शामिल हैं जो अपनी-अपनी पार्टियों की मौजूदा राजनीति से असंतुष्ट हैं। इस बयान से संकेत मिलता है कि AAP और GFP भविष्य में गठबंधन का विस्तार कर सकते हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव तक और कौन-कौन से दल या नेता इस मोर्चे का हिस्सा बनते हैं।
2022 के चुनाव में दोनों दलों का प्रदर्शन
2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में AAP ने 40 में से 39 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी को करीब 6.7 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं, GFP ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में केवल तीन सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीतने में सफल रही। दोनों दलों के पुराने प्रदर्शन को जोड़ें तो उनका संयुक्त वोट शेयर करीब 8.6 प्रतिशत बैठता है। हालांकि, गोवा जैसे छोटे और बहुकोणीय चुनावी मैदान में केवल वोट शेयर का जोड़ चुनावी सफलता की गारंटी नहीं देता। दोनों पार्टियों को अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों से बाहर जाकर संगठन और मतदाता आधार मजबूत करना होगा।
कांग्रेस के कमजोर होने का फायदा उठाने की कोशिश
2022 के चुनाव में BJP ने 20 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं। इसके बाद कांग्रेस के कई विधायक BJP में शामिल हो गए। इससे विधानसभा में कांग्रेस की ताकत काफी घट गई और BJP की संख्या बढ़ी। AAP और GFP अब इसी घटनाक्रम को कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं। उनका तर्क है कि जो पार्टी अपने चुनावी टिकट पर जीते विधायकों को अपने साथ नहीं रख पाई, वह BJP के खिलाफ मजबूत विपक्ष कैसे बन सकती है। यह रणनीति AAP के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह खुद को कांग्रेस के विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है।
गोवा में छोटे दल क्यों महत्वपूर्ण?
गोवा की राजनीति में क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका अक्सर बड़ी रही है। विधानसभा की सीटों पर जीत का अंतर कई बार बहुत कम रहता है और वोटों के बंटवारे से चुनावी नतीजे बदल सकते हैं। अगर BJP और कांग्रेस के अलावा AAP-GFP गठबंधन, RGP और अन्य दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, तो विपक्षी वोटों का विभाजन BJP के लिए फायदेमंद हो सकता है। यही वजह है कि ‘गोवा फर्स्ट’ के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी वोटों को एकजुट करने की भी होगी।
AAP के सामने अवसर और चुनौतियां
AAP के लिए दक्षिण गोवा में अपनी मौजूदा पकड़ को मजबूत करना अहम होगा। दूसरी ओर, GFP के पास स्थानीय पहचान और विजय सरदेसाई जैसा क्षेत्रीय चेहरा है। दोनों दलों का गठबंधन AAP की राष्ट्रीय संगठनात्मक क्षमता और GFP की स्थानीय राजनीतिक पकड़ को जोड़ने की कोशिश है। इसके अलावा, गठबंधन को गोवा के स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देनी होगी। केवल दिल्ली या पंजाब के राजनीतिक मॉडल को सामने रखने के बजाय स्थानीय रोजगार, पर्यटन, पर्यावरण, भूमि, बुनियादी ढांचे और शासन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट एजेंडा बनाना उसके लिए महत्वपूर्ण होगा।
2027 में कितनी सीटें होंगी AAP की कसौटी?
AAP के लिए 2027 में सिर्फ सरकार बनाना ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं होगा। यदि पार्टी अपनी दो मौजूदा सीटें बरकरार रखती है तो वह 2022 के प्रदर्शन को दोहराने में सफल मानी जाएगी। 4 से 6 सीटें उसे विधानसभा में एक महत्वपूर्ण विपक्षी ताकत बना सकती हैं, जबकि 7 से 10 सीटों तक पहुंचने पर गोवा की विपक्षी राजनीति का समीकरण काफी बदल सकता है। फिलहाल BJP अपनी मौजूदा विधानसभा ताकत के कारण मजबूत स्थिति में दिखाई देती है। लेकिन गोवा की राजनीति में त्रिशंकु विधानसभा और छोटे दलों की भूमिका को देखते हुए चुनाव से पहले कई नए समीकरण बन सकते हैं। ऐसे में ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन 2027 के चुनाव में कितना असर डालता है, यह उसके संगठन, उम्मीदवारों और विपक्षी वोटों को अपने पक्ष में खींचने की क्षमता पर निर्भर करेगा।


