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मुफ्त की च्यूइंगम चबा कर छुड़ाएं नशे की लत

ना अमीरी-गरीबी, ना चुनिंदा आयु वर्ग समूह, पृथक जाति-धर्म या समुदाय विशेष भी नहीं, अपितु पूरे समाज को नशा मुक्त करने जिला तंबाकू नशा-मुक्ति दल जागरूकता कार्यशालाओं

मुफ्त की च्यूइंगम चबा कर छुड़ाएं नशे की लत
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महासमुंद। ना अमीरी-गरीबी, ना चुनिंदा आयु वर्ग समूह, पृथक जाति-धर्म या समुदाय विशेष भी नहीं, अपितु पूरे समाज को नशा मुक्त करने जिला तंबाकू नशा-मुक्ति दल जागरूकता कार्यशालाओं के साथ-साथ अब शहरी एवं ग्रामीण अंचल के कस्बों और बस्तियों में लोगों के बीच पहुंच कर भी शिविर आयोजित कर रहा है। जहाँ, तंबाकू के आदी लोगों की नि:शुल्क जांच कर और दवा वितरण के साथ उन्हें जिला अस्पताल स्थित तंबाकू नशा-मुक्ति केंद्र आकर नशा-मुक्ति कोर्स पूरा करने के लिये प्रेरित भी किया जाता है, ताकि वे पूरी तरह से नशा मुक्त हों और दुबारा इसकी चपेट में न आयें।

इस कड़ी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.पी.वारे के निर्देशानुसार जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार के मार्गदर्शन में महासमुंद शहर स्थित वार्ड क्र.04 देवार पारा में शिविर लगाया गया। शासकीय सामाजिक कार्यकर्ता व सलाहकार असीम श्रीवास्तव ने कहा कि नशे से छुटकारा दिलाने के लिए जिला तंबाकू नशा-मुक्ति केंद्र शुरू किया गया है। यहां, हम काउंसलिंग के बाद चिकित्सकीय जांच व परीक्षण कर मुफ्त च्यूइंगम (मेडिकेटेड गम) खिलाकर नशे से छुटकारा दिलाते हैं। साथ ही साथ नि:शुल्क पैचेस व दवाओं के जरिये भी लोगों को धूम्रपान की लत से बाहर निकाल रहे हैं। विगत 06 महीनों के भीतर यहां 400 से अधिक महिला-पुरुषों ने नशा छोड़ने के लिए पंजीयन कराया।

इनकी काउंसलिंग और फॉलोअप के बाद कई लोगों को इस बुरी आदत से छुटकारा दिलाया जा चुका है। मनोवैज्ञानिक सलाहकार श्रीमती मेघा ताम्रकार ने शिविर में मरीजों का ओरल टेस्ट किया और तंबाकू नशे के नुकसान बतलाये। गैर संचारी रोग विभाग की सलाहकार सुश्री अदीबा बट्ट ने बताया कि नशा छोडने वालों में कई ऐसे बड़े नाम भी शामिल हैं। जो बरसों से तंबाकू की गिरफ्त में थे। नाम गोपनीय रखने की शर्त पर वे कहते हैं कि च्यूइंगम और परामर्श उनके लिए वरदान साबित हुआ। क्योंकि वे लाख कोशिशों के बाद भी इस बुरी लत को छोड़ नहीं पा रहे थे।

किन्तु, आज वे इससे पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार के मुताबिक केंद्र में एक वरिष्ठ चिकित्सक, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक सलाहकार और सामाजिक कार्यकर्ता व सलाहकार की ड्यूटी लगाई गई है। जो, पीड़ित व्यक्तियों को मनोवैज्ञानिक तरीके से तैयार कर उनके मुंह और फेफड़ों की जांच करते हैं। सप्ताह-भर तक उनके संपर्क में रहकर, दूसरे हफ्ते से निरूशुल्क च्यूइंगम व पैचेस देकर नशा छुड़वाने का प्रयास करते हैं।

नशा छोड़ने के लिए चिकित्सकों द्वारा विभिन्न तरह की सलाह दी जाती है उनमें तंबाकू युक्त वस्तुएं दूर कर दें, सप्ताह में तंबाकू रहित एक दिन की शुरुआत करें, दिनचर्या में बदलाव लाएं और सैर के लिए निकलें, ऐसे लोगों से दोस्ती रखें जो आदत छुड़ाने में मदद करें, अपने पास सौंफ, मिश्री, लौंग या इलायची रखें, उन जगह व लोगों से दूर रहें, जो तंबाकू की तलब दिलाएं इत्यादि शामिल हैं। इसी तरह नशा करने के कारण भी बताएं गएं जिनमें दोस्ती में नशा करना, अकेलेपन व खाली होने पर, कार्य स्थल पर एक-दूसरे को देख कर, घरेलू या बाहरी तनाव के कारण, भ्रामक विज्ञापनों या परिजनों से प्रभावित हो कर एवं समाज में अलग पहचान दिखाने शौक-शौक में इत्यादि शामिल है।


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