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गौतम अडानी ने बताया, क्यों ले लिया 20,000 करोड़ का एफपीओ वापस

गौतम अडानी ने बताया, क्यों ले लिया 20,000 करोड़ का एफपीओ वापस

गौतम अडानी ने बताया, क्यों ले लिया 20,000 करोड़ का एफपीओ वापस
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अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के एफपीओ को अडानी समूह ने बुधवार को रद्द कर दिया. समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने इसे रद्द करने की वजह खुद बताई है.

अमेरिकी फॉरेंसिक फाइनेंशल रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग द्वारा भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के व्यापारिक समूह पर लगाए गंभीर आरोपों के बाद पिछले पांच कारोबारी सत्रों में समूहों की कंपनियों का सामूहिक बाजार पूंजीकरण सात लाख करोड़ रुपये घट गया. बुधवार देर शाम एक नाटकीय घटनाक्रम में अडानी समूह ने अडानी एंटरप्राइजेज के पूरे बिक चुके एफपीओ को रद्द करने का फैसला लिया.

क्यों वापस लिया एएफपीओ

अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने इसको रद्द करने को लेकर एक बयान जारी किया. अडानी ने अपने बयान में कहा, "असाधारण परिस्थितियों के मद्देनजर, कंपनी के निदेशक मंडल ने फैसला किया है कि एफपीओ पर आगे बढ़ना नैतिक रूप से ठीक नहीं होगा. निवेशकों का हित हमारे लिए सर्वोपरि है और उन्हें किसी तरह के संभावित नुकसान से बचाने के लिए निदेशक मंडल ने एफपीओ को वापस लेने का फैसला किया है."

अडानी ने आगे कहा, "इस फैसले का हमारे मौजूदा ऑपरेशंस और भविष्य की योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हम योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन का ध्यान रखेंगे. साथ ही साथ भविष्य के प्लान पर ध्यान देंगे."

निवेशकों को पैसे लौटाएंगे

उन्होंने कहा कि एफपीओ के वापस होने के बाद निवेशकों के पैसे लौटा दिए जाएंगे. शेयर बाजार में बुधवार को क्रेडिट स्विस द्वारा समूह के बॉन्ड्स मार्जिन लोन पर रोक लगाने के बाद अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर में 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और स्टॉक 2,128 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था. बुधवार को अंडानी एंटरप्राइजेज का मार्केट कैप घटकर 2,42,672 करोड़ पर आ गया.

अडानी ने कहा, "बोर्ड इस अवसर पर हमारे एफपीओ के लिए आपके समर्थन और प्रतिबद्धता के लिए सभी निवेशकों को धन्यवाद देता है. एफपीओ के लिए सब्सक्रिप्शन कल (31 जनवरी) सफलतापूर्वक बंद हो गया. पिछले हफ्ते स्टॉक में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी के व्यवसाय और इसके प्रबंधन में आपका विश्वास रहा है."

अंडानी एंटरप्राइजेज का एफपीओ 27 जनवरी को निवेश के लिए खुला था और यह 31 जनवरी को बंद हुआ. इस एफपीओं को एंकर निवेशकों और अन्य निवेशकों ने हाथों हाथ लिया था. यहां तक कि अबु धाबी की एक कंपनी ने 3,200 करोड़ का निवेश किया था.

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से झटका

पिछले दिनों अमेरिकी रिसर्च ग्रुप हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें अडानी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे. रिपोर्ट में कहा गया कि अडानी ग्रुप के ऊपर कर्ज बहुत ज्यादा है जिसके कारण उसकी कंपनियों की स्थिरता पर संदेह है. यह रिपोर्ट कहती है कि अडानी ग्रुप ने टैक्स हेवन माने जाने वाले देशों का अनुचित इस्तेमाल भी किया है. हिंडनबर्ग ने अडानी पर अपनी रिपोर्ट में ग्रुप की गतिविधियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी ग्रुप ने विदेशों में बनाई अपनी कंपनियों का इस्तेमाल टैक्स बचाने के लिए किया है. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मॉरिशस और कैरेबियाई द्वीपों जैसे टैक्स हेवन में बनाई गईं कई बेनामी कंपनियां हैं जिनके पास अडानी की कंपनियों में हिस्सेदारी है.

हालांकि अडानी समूह ने इस रिपोर्ट के आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह "भारत पर हमला" है. अडानी समूह ने जवाब देते हुए कहा है कि यह "भारत, उसकी संस्थाओं और विकास की गाथा पर सुनियोजित हमला है." समूह ने 29 जनवरी को 413 पन्नों का जवाब जारी करते हुए कहा कि आरोप "झूठ के सिवाय कुछ नहीं है." अडानी समूह ने कहा हिंडनबर्ग की रिपोर्ट 'मिथ्या धारणा बनाने' की छिपी हुई मंशा से प्रेरित है ताकि अमेरिकी कंपनी को वित्तीय लाभ मिल सके.

बुधवार को अडानी समूह के शेयरों में गिरावट के साथ अडानी से एशिया और भारत में सबसे अमीर व्यक्ति का तमगा छिन गया. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से पहले लगभग 120 अरब डॉलर की उनकी कुल संपत्ति ने उन्हें दुनिया का तीसरा सबसे अमीर व्यक्ति बना दिया था.


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