कथा ज्ञान यज्ञ से भारतीय धर्म-संस्कृति की सुगन्ध घर-घर पहुंचे : योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने आज यहां कहा कि‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ के आयोजन के पीछे हमारा यही उद्देश्य है कि भारतीय धर्म-संस्कृति की सुगन्ध घर-घर में पहुंचे

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने आज यहां कहा कि‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ के आयोजन के पीछे हमारा यही उद्देश्य है कि भारतीय धर्म-संस्कृति की सुगन्ध घर-घर में पहुंचे।
श्री योगी बुधवार को यहां गोरखनाथ मन्दिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ की 50वीं एवं राष्ट्र सन्त ब्रह्मलीन महन्त अवैद्यनाथ की पांचवीं पुण्यतिथि समारोह के में ‘श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ’ के उद्घाटन के मौके पर कहा कि जब देश विपरीत परिस्थितियों में रहा है तथा संकर्मण काल से गुजरा , उस समय देश और समाज को एक करने का काम इन्ही कथाओं ने किया था।
‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ के आयोजन के पीछे हमारा यही उद्देश्य है कि भारतीय धर्म-संस्कृति की सुगन्ध घर-घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि श्री गोरक्षपीठ की समृद्ध परम्परा को नई दिशा देने वाले युगपुरूष महन्त दिग्विजयनाथ एवं राष्ट्रसंत महन्त अवैद्यनाथ भारतीय संस्कृति एवं संतो-योगियों की परम्परा के दिव्याकाश में चमकते हुए नक्षत्र हैं। उनका व्यक्तित्व कृतित्व तत्कालीन देश काल और परिस्थितियों की चुनौतियों का समाधान करते हुए देश, समाज तथा धर्म
को समर्पित था। उनकी पूर्ण स्मृति में प्रति वर्ष सप्ताह भर धार्मिक आध्यात्मिक आयोजनों के साथ सम सामयिक विषयों पर सम्मेलन आयोजित कर हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं। धर्म भारत का प्राण है और संस्कृति भारत की आत्मा है। भारतीय धर्म और संस्कृति का दर्शन भारतीय धर्म-ग्रन्थों में होता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भी दुष्टों के पतन तथा धर्म की प्रतिष्ठा के लिए भगवान के अवतरण की कथा है। युगपुरूष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ एवं महन्त अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रारम्भ यह श्रीमद्भागवत् कथा ज्ञान यज्ञ जीवन की सभी समस्याओं के निदान का मार्ग प्रशस्त करेगी। ‘धर्म की पुर्नप्रतिष्ठा और अधर्म का नाश’ भारतीय समाज का अभीष्ट रहा है और वह सदा बना रहेगा।


