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फिल्म रिव्यु - ड्रीम गर्ल 

इस सप्ताह दो हिंदी फिल्में 'सेक्शन 375' और 'ड्रीम गर्ल' और एक साउथ की हिंदी डब फिल्म 'पहलवान' रिलीज़ हुई

फिल्म रिव्यु - ड्रीम गर्ल 
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फिल्म रिव्यु
इस सप्ताह दो हिंदी फिल्में 'सेक्शन 375' और 'ड्रीम गर्ल' और एक साउथ की हिंदी डब फिल्म 'पहलवान' रिलीज़ हुई। हिंदी फिल्म सिनेमा का नज़रिया अब काफी बदलने लगा है इसीलिए वो अपने आसपास के किरदार और छोटे सब्जेक्ट को लेकर, छोटे ही बजट की फिल्म बनाकर दर्शकों का मनोरंजन करने लगे है, हम बात कर रहे है इस सप्ताह रिलीज़ फिल्म ड्रीम गर्ल की जिसमें निर्देशक राज शांडिल्य ने एक अजीबो गरीब सब्जेक्ट को लेकर ड्रीम गर्ल का ताना बाना बुना है वैसे ड्रीम गर्ल का नाम आते ही हमें हेमा मालिनी का खूबसूरत चेहरा नज़र आता है जो उस वक़्त ड्रीम गर्ल के नाम से काफी मशहूर हुई थी लेकिन यहाँ ड्रीम गर्ल बने है आयुष्मान खुराना, तो वहीँ निर्देशक अजय बहल ने सेक्शन 375 में रेप केस जैसे गंभीर विषय पर फिल्म बनाकर दर्शकों के सामने रखी है पहले बात करते है ड्रीम गर्ल की।
फिल्म रिव्यु - ड्रीम गर्ल
कलाकार - आयुष्मान खुराना, अन्नू कपूर, नुसरत भरूचा, मंजोत सिंह, विजय राज और अभिषेक बनर्जी
कहानी- ड्रीम गर्ल की कहानी शुरू होती है यूपी के एक गांव से, जहाँ करमवीर यानि आयुष्मान खुराना जो छोटे छोटे नाटकों में महिलाओं के किरदारों को बखूबी निभाता है कभी द्रोपदी, कभी राधा या कभी कामवाली बाई बनकर और साथ में पैसा भी कमाता है। उसके पिता दिलजीत यानि अन्नु कपूर जोकि अंतिम संस्कार का सामान बेचते है और उनके सरपर काफी कर्ज़ा है जिसका भुगतान करमवीर समय समय पर करता रहता है। अपने पिता को क़र्ज़मुक्त करवाने के लिए वो एक कॉल सेंटर में नौकरी करता है जहाँ वो पूजा नाम की लड़की बनकर लोगों को कॉल करता है और धीरे धीरे उसे पता चलता है की आज फेसबुक व्हाट्सप्प पर तो काफी दोस्त है लेकिन निजी ज़िन्दगी में सभी खुद को बहुत अकेला महसूस करते है और इसी अकेलेपन को करमवीर समझता है। कॉल सेंटर के द्धारा बातें करते करते कुछ लोग उसके बहुत करीब आ जाते है जिसमें एक बाल ब्रह्मचारी है, तो दूसरे की बीवी परलोक सिधार गयी है, एक लड़की जो अपने प्रेमी से धोखा खा चुकी है तो एक क्लाइंट है जो अपनी पत्नी से परेशान है। परेशानी तब शुरू होती है जब यह पांच छः क्लाइंट पूजा से प्यार करने लग जाते है फिर क्या होता है यह तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा।

निर्देशन - निर्देशक राज शांडिल्य ने फिल्म को बहुत मजबूती से पकड़ा है और एक अलग सब्जेक्ट की फिल्म बनाकर दर्शकों के सामने रख दी है जिसमें दर्शकों का काफी मनोरंजन होता है। फिल्म की स्टोरी काफी मजेदार है खासकर इसके डायलॉग और पंच। निर्देशक की तारीफ करनी होगी जिसने आयुष्मान खुराना जैसे एक्टर का चुनाव किया।

एक्टिंग - एक्टिंग के बारे में कहा जाए तो दिल्ली का छोकरा आयुष्मान लोगो के दिलों पर छा गया है, उन्होंने हमेशा लीग से हटकर फिल्म की है अपनी पहली फिल्म विक्की डोनर, बधाई हो, शुभ मंगल सावधान या फिर अंधाधुंध सभी में उन्होंने अपनी एक्टिंग से दर्शकों के दिल में जगह बनाई है और इस फिल्म में तो उनके एक्सप्रेशन लाजवाब है, अगर वो लड़की की आवाज़ में बोल रहे है तो उनके फेस के एक्सप्रेशन बिल्कुल लड़कियों जैसे ही है। इसके साथ ही अन्नु कपूर जब भी स्क्रीन पर आते है छा जाते है और दिखा देते है की मेरे आगे आजकल के नौजवान भी नही टिक पाते, वहीँ नुसरत भरूचा जितनी खूबसूरत लगी है उतनी ही खूबसूरत उसने एक्टिंग की है। बाकि कलाकारों में मंजोत सिंह, विजय राज और अभिषेक बनर्जी ने भी अपने काम को बखूबी निभाया है।
फिल्म रिव्यु - सेक्शन 375
वहीं दूसरी फिल्म सेक्शन 375 आज के समाज को आईना दिखाती हुई फिल्म है, पिछले कुछ सालों में जितने घिनौने अपराध हुए है उन सबमें सबसे ऊपर है रेप। आजका इंसान इतना हैवान हो गया है की उसे पता ही नहीं चलता की वो एक पांच साल की बच्ची को देख रहा है या बीस साल की औरत को, उसकी नज़र में एक छोटी बच्ची भी उसे एक औरत नज़र आती है और वो अपनी हवस मिटाता है। इस मामले में हमारा कानून हमारी न्याय व्यवस्था क्या कहती है यह भी सोचने की बात है। वहीँ आजकल यह भी हो रहा है की रेप के मामले में पुरुष को ही गलत माना जाता है कुछ महिलाएँ अपना बदला लेने या किसी और वजह से भी पुरुष को बदनाम करने से नहीं चूकती है यहीं सब लेकर आयी है सेक्शन 375 । फिल्म की कहानी की बात करे तो निर्देशक अजय बहल ने आज का मुद्दा उठाया है जो अमीर घरानों की कीचड़ भरी ज़िन्दगी को दिखाती है। फिल्म में फैशन डिज़ाइनर अंजलि यानि मीरा चोपड़ा जो मशहूर डायरेक्टर रोहन खुराना यानि राहुल भट्ट पर रेप का आरोप लगाती है जिसमें कोर्ट में बहस होती है और रोहन को कड़ी सजा के रूप में दस साल जेल जाना पड़ता है। रोहन अपने केस को आगे बढ़ाता है क्योंकि उसका कहना है की उसने ऐसा कुछ नहीं किया है, उसका केस लड़ने आते है तरुण सलूजा यानि अक्षय खन्ना जो हाई कोर्ट के वकील है जो रोहन को बेक़सूर बताते है। वही अंजलि का केस लड़ती है पब्लिक प्रोसिक्यूटर हीरल मेहता यानि ऋचा चड्ढा। जो एकदूसरे के खिलाफ दलीले पेश करते है और उन दलीलों से खुलती है नई नई कहानियां, फिर क्या होता है यह तो फिल्म देखकर ही पता चलेगा। फिल्म में अक्षय खन्ना और ऋचा चड्ढा ने बेहरीन एक्टिंग की है लेकिन फिल्म का ज्यादातर हिस्सा कोर्टरूम में ही दिखाया गया है जिससे दर्शक बोझिल से होने लगते है और फिल्म दर्शकों को पूरी तरह से नहीं बांध पाती।
कुल मिलाकर मनोरंजन और बिज़नेस के हिसाब से देखें तो ड्रीम गर्ल दर्शकों के मनोरंजन के लिए खरी उतरती है।
फिल्म समीक्षक
सुनील पराशर


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