भ्रूण जांच: कानून में ढील संबंधी अधिसूचना पर रोक से ‘सुप्रीम’ इन्कार
उच्चतम न्यायालय ने गर्भ एवं भ्रूण जांच से संबंधित कुछ नियमों में ढील को लेकर सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से सोमवार को इन्कार कर दिया।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गर्भ एवं भ्रूण जांच से संबंधित कुछ नियमों में ढील को लेकर सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से सोमवार को इन्कार कर दिया।
शीर्ष अदालत ने हालांकि केंद्र सरकार समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया।
न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केरल निवासी साबू मैथ्यू जॉर्ज की याचिका की सुनवाई के दौरान प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (पीसीपीएनडीटी) एक्ट, 1994 की धारा चार में दी गयी ढील संबंधी सरकार की चार अप्रैल की अधिसूचना पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया।
न्यायालय ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उसके लिए संभव नहीं होगा। देश अभी एक राष्ट्रीय संकट से जूझ रहा है।
न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि चिकित्सकों को कोरोना महामारी में सेवा देने के लिए संरक्षित करने की आवश्यकता है।
न्यायालय ने कहा कि यदि अधिसूचना 30 जून से आगे बढ़ाई गयी तो याचिकाकर्ता को यह मुद्दा उठाने की आजादी है।
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में करने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि गत चार अप्रैल को जारी अधिसूचना के तहत प्रयोगशालाओं, क्लीनिकों के पंजीकरण और पूर्व गर्भाधान, गर्भावस्था आदि से संबंधित अभिलेखों के रखरखाव संबंधी नियमों को निलंबित कर दिया गया है, जिसे याचिकाकर्ता ने चुनौती दी है।


