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लापरवाही की भेंट चढ़ा महिला नसबंदी शिविर

जतारा ! शासन द्वारा महिला नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए भले ही प्रचार प्रसार कर लाखों का बजट खर्च किया जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते

लापरवाही की भेंट चढ़ा महिला नसबंदी शिविर
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जतारा ! शासन द्वारा महिला नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए भले ही प्रचार प्रसार कर लाखों का बजट खर्च किया जा रहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ना केवल उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है अपितु शिविर में लापरवाही भी देखने का मिल रही है। इतना ही नही नसबंदी का आपरेशन कराने के लिए आने वाली महिलाओं को शासन के नियम के अनुसार सुविधाएं भी नही मिल रही हैं।
इसके साथ ही जतारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में शिविर के दौरान महिलाओं को बैठने तक के लिए पर्याप्त व्यवस्था नही होने से उनको बिना फर्श के जमीन पर ही बैठना पडता है। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कई महिलाओं को कोई ना कोई कमी बताकर बिना नसंबदी आपरेशन कराये ही भगाया जा रहा है। गुरूवार को भी नसबंदी शिविर के दौरान 26 महिलाओं का ऑपरेशन सर्जन सीके चतुर्वेदी द्वारा किये गये तो वहीं तीन महिलाओं को भगा दिया गया। रामगढ़ के मातादीन, रामकिशोर, मांची के धमेन्द्र, गरौली के घनश्याम, रामसेवक आदि ने बताया की जतारा अस्पताल में आपरेशन के दौरान कोई सुविधाएं नही मिल रही है। आपरेशन के एक घंटे बाद ही उनकी छुटटी कर दी जाती है।
यहां इस बात का उल्लेख करना भी आवश्यक है कि शासन द्वारा महिलाओं को लाने ले जाने की व्यवस्था करने का काम विभाग का सौंपा गया है लेकिन यहां आपरेशन के बाद महिला अपने स्वयं का वाहन किराये पर लेकर जाने को मजबूर है। शासन के नियम है कि नसबंदी के दौरान आपरेशन कराने वाली महिलाओं को शासकीय वाहन से उनके घरा पर छोड़ा जाये लेकिन यहां पर तो जिनी वाहनों को ही किराये पर लेकर उनके परिजन घर ले जाते हैं और आज भी ऐसा नजारा देखने को मिला हैं। लेखापाल हरिकिशन जागीदार से इस मामले को लेकर बात की गई तो उन्होने बताया कि नसबंदी शिविर में आपरेशन कराने वाली महिलाओं को शासकीय वाहन से घर भिजवाने की व्यवस्था है लेकिन में आज टीकमगढ में हूं, इस लिए पता नही है अगर वहां पर शासकीय वाहन नही है तो इस मामले पर बीएमओ साहव से बात करे। इस संबंध में जब बीएमओ डॉ. राहुल जैन से बात की गई तो उन्होने बताया कि हमारा काम व्यवस्था बनाना है और महिलाओं को घर तक भिजवाने का काम लेखापाल का है लेकिन वह आये दिन शिविर से नदारत रहते हैं लेकिन आज हम महिलाओं घर तक भिजवाने की व्यवस्था कर रहे हैं।


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