नशे के खिलाफ उत्तर प्रदेश में बड़ी मुहिम, गांवों से लेकर स्कूल-कॉलेजों तक जागरूकता अभियान
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चला रही है। 1352 प्रतियोगिताओं, 1767 संगोष्ठियों और 829 सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नशे के खिलाफ जनजागरूकता को जनांदोलन का स्वरूप देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार सक्रिय है। नशामुक्त समाज के निर्माण के लक्ष्य को लेकर राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेशभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया है। मद्यनिषेध विभाग के माध्यम से गांवों, कस्बों, स्कूलों और कॉलेजों तक नशे के दुष्प्रभावों का संदेश पहुंचाया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखकर स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सके।
सरकार का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई से नशे की समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को सही दिशा में प्रेरित करना बेहद आवश्यक है। इसी सोच के तहत विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताओं के जरिए जागरूकता
मद्यनिषेध विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में नशा विरोधी विषयों पर बड़े पैमाने पर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। निबंध लेखन, भाषण, पोस्टर निर्माण, चित्रकला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में कुल 1352 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें हजारों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 5404 विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर नशे के खिलाफ मजबूत सामाजिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचा जनजागरूकता अभियान
नशामुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा गया। ग्रामीण इलाकों में भी विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर युवाओं और आम नागरिकों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। गांवों में खेलकूद प्रतियोगिताएं, जनसभाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिन्हें स्थानीय लोगों का अच्छा समर्थन मिला।
सरकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचाना है कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि परिवार और समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
1767 संगोष्ठियों और 356 प्रदर्शनियों से फैला संदेश
मद्यनिषेध विभाग ने राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। इस दौरान 40 राज्य स्तरीय और 1727 जिला स्तरीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धर्मगुरुओं, सरकारी कर्मचारियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लेकर नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
इसके अलावा प्रदेशभर में 356 प्रदर्शनियां लगाई गईं, जिनके माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों और उससे होने वाले सामाजिक व आर्थिक नुकसान के बारे में जानकारी दी गई। मेलों, त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और राष्ट्रीय पर्वों के दौरान भी विशेष अभियान चलाए गए।
नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बने प्रभावी माध्यम
जनसामान्य तक सरल और प्रभावी ढंग से संदेश पहुंचाने के लिए विभाग ने सांस्कृतिक गतिविधियों का भी सहारा लिया। वर्षभर में 829 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो, लोकगीत, कव्वाली, जादू कार्यक्रम और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया।
सरकार का मानना है कि सामाजिक भागीदारी और जनजागरूकता के जरिए ही नशामुक्त उत्तर प्रदेश का सपना साकार किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से आने वाले समय में भी ऐसे अभियानों को और व्यापक बनाने की योजना है।


