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‘डीपफेक का चोला पहनकर भी नहीं बचेंगे अपराधी’, सीएम योगी की दो टूक; यूपी में एआई और फॉरेंसिक से होगी जांच

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेक संगम 2026 में कहा कि डीपफेक और AI के जरिए अपराध करने वालों को भी वैज्ञानिक जांच से खोजा जाएगा। लखनऊ में LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू हुआ, यूपी ने 2030 तक 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य रखा।

‘डीपफेक का चोला पहनकर भी नहीं बचेंगे अपराधी’, सीएम योगी की दो टूक; यूपी में एआई और फॉरेंसिक से होगी जांच
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लखनऊ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक और साइबर अपराध के बढ़ते दौर में उत्तर प्रदेश सरकार ने वैज्ञानिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपराधी तकनीक का कितना भी सहारा ले लें, आधुनिक फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद से उन तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI मददगार हो सकता है, लेकिन उसे अंतिम निर्णय लेने वाला नहीं बनना चाहिए। तकनीक का इस्तेमाल मानव विवेक और जिम्मेदारी के साथ किया जाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच से अपराध अनुसंधान को प्रभावी बनाया जा सकता है और न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

LEXQ सेंटर शुरू, कानून और क्वांटम तकनीक का होगा मेल

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने देश के पहले ‘LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य कानून, क्वांटम तकनीक और फॉरेंसिक विज्ञान के बीच समन्वय को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में कंसेंट मैनेजमेंट पोर्टल भी लॉन्च किया गया, ‘अभेद्य’ परियोजना की आधारशिला रखी गई और ‘AI in Construction’ पुस्तक का विमोचन हुआ।

मुख्यमंत्री ने ‘लॉ विद लैब्स’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि कानून और विज्ञान को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा। डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता, साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

‘CID’ की रील लाइफ अब यूपी में रियल लाइफ

फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता समझाते हुए योगी आदित्यनाथ ने लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘CID’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले लोग टेलीविजन पर देखते थे कि बाल या फिंगरप्रिंट जैसे साक्ष्यों के आधार पर अपराधी तक कैसे पहुंचा जाता है। अब आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक के माध्यम से वास्तविक जांच में भी ऐसे साक्ष्यों का उपयोग किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने एक पुराने आपराधिक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में देरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने नए आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने के महत्व पर भी जोर दिया।

प्रदेश की 18 पुलिस रेंजों में विकसित हो रहीं फॉरेंसिक लैब

योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंजों में फॉरेंसिक लैब विकसित की जा रही हैं। इनमें से 12 लैब तैयार हो चुकी हैं, जबकि छह अन्य अंतिम चरण में हैं। इसके अतिरिक्त 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात किए जाने की जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर समय से पहुंचकर साक्ष्य जुटाने से जांच की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। लखनऊ में जिस करीब 100 एकड़ जमीन पर फॉरेंसिक संस्थान बनाया गया है, मुख्यमंत्री के अनुसार, वह पहले भू-माफिया के कब्जे में थी। कार्रवाई के बाद जमीन मुक्त कराई गई और वहां संस्थान विकसित किया गया।

2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को AI, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर तकनीक का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद प्रदेश में 35 हजार नए उद्योग स्थापित हुए हैं और राज्य को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। मुख्यमंत्री ने बेहतर कानून-व्यवस्था, औद्योगिक निवेश और तकनीकी विकास को प्रदेश की आर्थिक प्रगति से जोड़ा।

पांच हजार से अधिक अधिकारियों को मिल चुका प्रशिक्षण

UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने बताया कि संस्थान पुलिस, रक्षा बलों और प्रशासन से जुड़े पांच हजार से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है। यहां DNA, साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक्स सहित आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं।

सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्य, AI और क्वांटम तकनीक पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शिक्षा, अनुसंधान, फॉरेंसिक विज्ञान और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए।


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