दक्षिण भारत के हर राज्य का सरकार ने दूर किया भ्रम, बताया कहां होंगी कितनी लोकसभा सीटें
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दक्षिण भारत के हर राज्य का ख्याल रखा है। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार भी केरल की सीटें सिर्फ 20 से बढ़कर 23 ही होतीं, लेकिन अब यह आंकड़ा 30 होगा। इस तरह उनका कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि उनके हितों की रक्षा ही की जाएगी।

नई दिल्ली। दक्षिण भारत के राज्यों की लोकसभा सीटों का अनुपात नए सिरे से होने वाले परिसीमन में कम हो सकता है। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर ऐसी आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं, लेकिन सरकार ने आज लोकसभा में हर भ्रम को दूर कर दिया। भाजपा के सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा कि दक्षिण भारत के किसी भी राज्य का कोई नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी जनगणना से लिंक कर लें तो परिसीमन की स्थिति में साउथ इंडिया का ही नुकसान होता, लेकिन इस संशोधन विधेयक से ऐसा कुछ नहीं होगा। सीधे तौर पर 50 फीसदी सीटें हर राज्य में बढ़ाने का फैसला ऐतिहासिक है और सभी के साथ न्याय करने वाला है।
उनकी बात से स्पष्ट है कि 2011 या फिर नई जनगणना के आधार पर परिसीमन नहीं होगा बल्कि यह 2002 में हुए परिसीमन में सीधे तौर पर 50 पर्सेंट का इजाफा होगा। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि केरल की आज 20 सीटें हैं। यदि 2027 की जनगणना के आधार पर ऐसा किया गया तो उसकी 14 सीटें ही रह जाएंगी। अब यदि महिला आरक्षण लागू हुआ तो वेणुगोपाल के पास ही केरल में सीट नहीं रहेगी। इसलिए सरकार का यह फैसला है कि किसी राज्य का नुकसान ना हो। उसने केरल की 6 सीटों को तो बचाया ही है, उसका हिस्सा भी बनाकर रखा है। यहां तक कि जनगणना के आंकड़ों की बात करें तो उसका हिस्सा ज्यादा ही रहेगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के हितों की रक्षा करने की बात कही।अभी की स्थिति में तो सरकार ने केरल की सीटें बढ़ाकर 30 कर दी हैं। उन्होंने कहा कि अब यदि तमिलनाडु की बात करें तो वहां पर यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन हुआ तो फिर वहां 39 की बजाय 49 सीटें ही रहतीं, लेकिन इस सरकार ने 59 का प्रस्ताव रखा है। तेजस्वी सूर्या ने कहा कि इन लोगों की कोई तैयारी ही नहीं थी। अब ये लोग समझना भी नहीं चाहते हैं क्योंकि उनका इरादा बहस का नहीं बल्कि सिर्फ विरोध का है। केरल की सीट सिर्फ 23 होतीं और अब उसे 30 मिल रही हैं। आंध्र प्रदेश को 37 सीटें मिलने वाली हैं।
दक्षिण भारत की हिस्सेदारी 23 फीसदी बनी रहेगी
तेजस्वी सूर्या ने कहा कि इस परिसीमन के बाद भी दक्षिण भारत के राज्यों का अनुपात 23.9 फीसदी ही रहेगा। यही पहले भी था। इस तरह कोई बदलाव नहीं होने वाला है। फिर भी आखिर इतना ड्रामा क्यों हो रहा है। तमिलनाडु में बिल की कॉपी ही फाड़ दी गई। ऐसा ड्रामा करने की भी कोई लिमिट होती है।
अब प्रचार किया जा रहा है कि यदि सभी राज्यों में 50 फीसदी सीटें बढ़ती हैं तो दक्षिण भारत का नुकसान होगा। उन्होंने ए. राजा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं उतना ही साउथ इंडियन हूं, जितना आप हैं। बस फर्क इतना है कि मैं अलगाववाद की भाषा नहीं बोलता। मैं देश के हर हिस्से को एक समान मानता हूं।


