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पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज पेश होगा यूसीसी बिल, शादी-तलाक से विरासत तक कई नियमों में होगा बदलाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश होने जा रहा है। शादी, तलाक, विरासत और संपत्ति से जुड़े नियमों में समान कानून लागू करने को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज पेश होगा यूसीसी बिल, शादी-तलाक से विरासत तक कई नियमों में होगा बदलाव
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। यदि यह विधेयक पारित होता है तो राज्य में विभिन्न धार्मिक समुदायों के अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान नागरिक कानून लागू हो सकेगा।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने संकल्प पत्र में सत्ता में आने के छह महीने के भीतर यूसीसी लागू करने का वादा किया था। सरकार का दावा है कि वह अपने चुनावी वादे को समय से पहले पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल भी इस दिशा में आगे बढ़ने वाला राज्य बन सकता है।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता ऐसा कानूनी ढांचा है, जिसके तहत सभी नागरिकों पर धर्म से इतर एक समान नागरिक कानून लागू होता है। इसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेना और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों के लिए एक जैसी कानूनी व्यवस्था का प्रावधान होता है।

वर्तमान में भारत में विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। यूसीसी लागू होने की स्थिति में इन मामलों में एक समान कानून लागू करने का प्रावधान किया जाता है।

सरकार का क्या है उद्देश्य?

राज्य सरकार का कहना है कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य नागरिक अधिकारों में समानता सुनिश्चित करना और अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान सिविल व्यवस्था लागू करना है। सरकार का मानना है कि इससे कानूनी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समान होगी।

विधानसभा के बजट सत्र में यह विधेयक सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रहने की संभावना है। इस पर पहचान, धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक अधिकार, महिलाओं के अधिकार और व्यक्तिगत कानूनों को लेकर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।

भाजपा और विपक्ष आमने-सामने

यूसीसी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद भी तेज हो गए हैं। भाजपा इसे सभी नागरिकों के लिए कानून के समक्ष समानता स्थापित करने वाला कदम बता रही है। वहीं विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण सामाजिक और कानूनी बदलाव से पहले सभी समुदायों के साथ व्यापक संवाद और सहमति जरूरी है।

विपक्षी दलों का तर्क है कि यह विषय केवल कानून का नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसे व्यापक चर्चा के बाद ही लागू किया जाना चाहिए।

घोषणापत्र का प्रमुख वादा

भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान जारी अपने संकल्प पत्र में यूसीसी लागू करने का वादा किया था। उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भाजपा सरकार बनने के छह महीने के भीतर पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। पार्टी का दावा है कि यह कानून धर्म से ऊपर उठकर सभी नागरिकों को समान अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

यूसीसी लागू करने वाला पश्चिम बंगाल बनेगा चौथा राज्य

पश्चिम बंगाल भारत में यूसीसी विधेयक लागू करने वाले देश का चौथा राज्य बनेगा। इससे पहले गुजरात, उत्तराखंड और असम में यह बिल लागू हो चुका है। उत्तराखंड ने सबसे पहले यह बिल लागू किया था। जबकि अब पश्चिम बंगाल में भी इस बिल को लेकर प्रक्रिया शुरू हो रही है।


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