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बंगाल के स्कूलों में बदलेगा इतिहास का पाठ, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद सिलेबस में शामिल

पश्चिम बंगाल के स्कूलों के सिलेबस में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद को शामिल करने की तैयारी है। इतिहास, विभाजन और समाज सेवा से जुड़े पहलुओं पर फोकस रहेगा।

बंगाल के स्कूलों में बदलेगा इतिहास का पाठ, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद सिलेबस में शामिल
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में इतिहास से जुड़े पाठ्यक्रम को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार की योजना के तहत भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद के जीवन, विचारों और योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को पश्चिम बंगाल के इतिहास और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी देना बताया जा रहा है। प्रस्तावित पाठ्यक्रम में दोनों हस्तियों के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यों को प्रमुखता मिलने की संभावना है।

विभाजन के दौर के इतिहास पर भी रहेगा फोकस

पाठ्यक्रम में 1947 के विभाजन के दौर और उस समय बंगाल में पैदा हुई परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में शामिल किए जाने की बात कही जा रही है। उस दौर में विस्थापन, सामाजिक अस्थिरता और लोगों के पुनर्वास जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण रहे थे।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राजनीतिक जीवन के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और बंगाल से जुड़े उनके सार्वजनिक जीवन को छात्रों के सामने रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य बताया जा रहा है कि विद्यार्थी अपने राज्य के इतिहास को अलग-अलग दृष्टिकोणों और प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के योगदान के माध्यम से समझ सकें।

स्वामी प्रणवानंद के समाज सेवा कार्य भी पढ़ेंगे छात्र

स्वामी प्रणवानंद के योगदान को भी प्रस्तावित पाठ्यक्रम में अहम स्थान दिया जाएगा। भारत सेवाश्रम संघ के माध्यम से समाज सेवा, राहत कार्य और जरूरतमंदों की मदद से जुड़े उनके कार्यों के बारे में छात्रों को जानकारी दी जाएगी।

स्वामी प्रणवानंद ने अध्यात्म और सामाजिक सेवा को साथ जोड़ते हुए संगठन के माध्यम से विभिन्न सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाया। पाठ्यक्रम में उनके विचारों और सेवा कार्यों को शामिल किए जाने से विद्यार्थियों को समाज सेवा और मानवीय जिम्मेदारी के पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।

स्कूलों को 300 करोड़ रुपये के अनुदान की योजना

सिलेबस में प्रस्तावित बदलाव के साथ राज्य के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए 300 करोड़ रुपये के अनुदान का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करना बताया गया है।

इसके अलावा स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य करने और अटल टिंकरिंग लैब्स शुरू करने की योजना भी इस व्यापक शिक्षा पहल का हिस्सा बताई गई है। इन बदलावों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के व्यापक ढांचे से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद छात्रों को बंगाल के इतिहास के साथ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राजनीतिक एवं शैक्षणिक योगदान और स्वामी प्रणवानंद के सामाजिक-आध्यात्मिक कार्यों के बारे में पढ़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि, पाठ्यक्रम में इन विषयों को किस कक्षा और किस स्तर पर किस रूप में शामिल किया जाएगा, इसका विस्तृत प्रारूप सामने आना बाकी है।


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