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विजय माल्या से अब भी वसूलने हैं ₹8,752 करोड़, एसबीआई कंसोर्टियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दी जानकारी

विजय माल्या से अब भी ₹8,752 करोड़ की रकम वसूलना बाकी है। SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में यह जानकारी दी। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

विजय माल्या से अब भी वसूलने हैं ₹8,752 करोड़, एसबीआई कंसोर्टियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दी जानकारी
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नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर बैंक कर्ज और रिकवरी को लेकर चर्चा में हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया है कि 31 अगस्त 2026 तक माल्या से करीब ₹8,751.86 करोड़ की रकम अभी भी वसूल की जानी बाकी है। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब माल्या की ओर से दावा किया गया है कि बैंकों ने उनकी देनदारी से ज्यादा रकम वसूल कर ली है।

2020 में माल्या ने दाखिल की थी याचिका

विजय माल्या ने साल 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को खत्म करने की मांग की थी। माल्या की दलील थी कि बैंकों और उनके बीच वित्तीय विवाद काफी हद तक सुलझ चुका है और उनकी संपत्तियों से पर्याप्त रकम की रिकवरी की जा चुकी है।

हालांकि, कोर्ट के निर्देश के बाद दाखिल दस्तावेजों में SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने अलग स्थिति बताई है। बैंकों के मुताबिक, डेट रिकवरी ऑफिसर के जरिए करीब ₹10,270 करोड़ की रकम अस्थायी रूप से रिकवर की गई है। इसके अलावा डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में मामला जाने से पहले ₹544.58 करोड़ की अतिरिक्त रिकवरी भी हुई थी।

जनवरी में ₹8,135 करोड़ था बकाया

बैंकों की ओर से दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, जनवरी 2026 में विजय माल्या से ₹8,135.63 करोड़ की रकम वसूलना बाकी थी। बाद में अन्य खर्चों और देनदारी में हुई बढ़ोतरी के चलते 31 अगस्त तक यह आंकड़ा बढ़कर करीब ₹8,751.86 करोड़ हो गया। कंसोर्टियम का कहना है कि रिकवरी के आंकड़े को मौजूदा बकाया से अलग करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि रिकवरी सर्टिफिकेट के तहत देनदारी और अन्य देनदारी बाकी हैं।

ED ने भी बताई अलग स्थिति

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, माल्या से जुड़ी करीब ₹14,131.6 करोड़ की संपत्तियां सरकार को जब्त हुई थीं और बाद में SBI के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को बहाल की गईं। हालांकि ED का कहना है कि संपत्तियों की सिविल रिकवरी से मनी लॉन्ड्रिंग की आपराधिक कार्यवाही अपने आप खत्म नहीं होती।

वहीं माल्या की ओर से तर्क दिया गया है कि यदि मूल देनदारी से ज्यादा रकम की रिकवरी हो चुकी है, तो आपराधिक कार्यवाही को समाप्त किया जाना चाहिए। कंसोर्टियम ने इस दलील का विरोध किया है और कहा है कि कुछ संलग्न शेयर अभी भी बेचे नहीं गए हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। फिलहाल बैंक रिकवरी और आपराधिक कार्यवाही से जुड़े दोनों पहलुओं पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।


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