वेनेजुएला में भूकंप से भारी तबाही, अब तक188 लोगों की मौत; 200 से अधिक अब भी मलबे में फंसे
वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से 188 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक लोग अब भी मलबे में फंसे हैं। भारत समेत कई देशों ने राहत सहायता की पेशकश की है।

7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप से हिला देश
विशेषज्ञों के अनुसार 7.2 और 7.5 तीव्रता के इन भूकंपों को वेनेजुएला में पिछले 100 वर्षों के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा में करीब 1,500 लोग घायल हुए हैं, जबकि हजारों लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है।
राजधानी काराकास के उत्तर में स्थित तटीय क्षेत्र ला ग्वाइरा सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां दर्जनों बहुमंजिला इमारतें धराशायी हो गईं और कई रिहायशी इलाकों में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। भूकंप के झटकों का असर इतना व्यापक था कि ब्राजील के अमेजन क्षेत्र तक महसूस किया गया, जहां एहतियात के तौर पर कई इमारतों को खाली कराया गया।
मलबे में अपनों को तलाशते रहे लोग
भूकंप के बाद हजारों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में मलबे के आसपास डटे रहे। बचावकर्मी भारी मशीनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर जीवित लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी जुआन अल्बर्टो मेंदानो ने बताया कि उन्होंने मलबे में फंसी एक महिला को मदद के लिए हाथ हिलाते देखा, लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण तत्काल उसे बाहर नहीं निकाला जा सका। वहीं कई परिवार अपने लापता परिजनों के नाम पुकारते हुए राहत शिविरों और क्षतिग्रस्त इमारतों के आसपास भटकते रहे।
भारत समेत कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ
वेनेजुएला में आई इस भीषण आपदा के बाद भारत, अमेरिका समेत कई देशों ने राहत सहायता की पेशकश की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में वेनेजुएला की हरसंभव सहायता के लिए तैयार है।
संयुक्त राष्ट्र से प्रमाणित खोज एवं बचाव दल भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने निजी कंपनियों से भारी निर्माण मशीनें उपलब्ध कराने की अपील की है ताकि राहत कार्य तेज किया जा सके।
राहत अभियान बना सरकार के लिए बड़ी चुनौती
भूकंप ने कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। उन्होंने ला ग्वाइरा को "आपदा क्षेत्र" घोषित करते हुए कहा कि देशभर से बचाव दल वहां भेजे जा रहे हैं। राज्य मीडिया के अनुसार राहतकर्मियों ने मलबे से तीन बच्चों को जीवित बाहर निकालने में सफलता भी हासिल की है।
अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस न लौटने की अपील की है। वहीं काराकास और आसपास के क्षेत्रों में हजारों लोगों ने एहतियात के तौर पर खुले मैदानों, पार्कों और राहत शिविरों में रात बिताई। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आफ्टरशॉक की संभावना को देखते हुए सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।


