वीबी-जी राम जी पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, बोली- ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी चोरी; तमिलनाडु ने किया 25 दिन अतिरिक्त काम का ऐलान
VB-G RAM G योजना को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर ग्रामीण रोजगार और मजदूरों की मजदूरी में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। वहीं, तमिलनाडु सरकार ने पात्र परिवारों को 25 दिन अतिरिक्त रोजगार देने की घोषणा की है।

नई दिल्ली। ग्रामीण रोजगार योजना VB-G RAM G को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मनरेगा की जगह लाई गई नई व्यवस्था ग्रामीण मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा कवच को कमजोर कर रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने महाराष्ट्र के बीड जिले में कथित फर्जी हाजिरी और मजदूरी में अनियमितताओं से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, तमिलनाडु सरकार ने पात्र ग्रामीण परिवारों को योजना के तहत 125 दिन का काम पूरा करने के बाद राज्य के कोष से 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार देने की घोषणा की है।
कांग्रेस बोली- ग्रामीण रोजगार की सुरक्षा पर हमला
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि महाराष्ट्र के बीड और आसपास के जिलों में सूखे की स्थिति के बीच ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार योजना बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, मनरेगा ग्रामीण लोगों को मुश्किल समय में काम की गारंटी देने वाला सुरक्षा कवच था। कांग्रेस ने VB-G RAM G को इस व्यवस्था के कमजोर होने से जोड़ते हुए इसे ग्रामीण भारत के सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर हमला बताया।
रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि बीड जिले में पांच स्थानों पर सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों की मौजूदगी दिखाई गई, लेकिन मौके पर कोई मजदूर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ग्रामीणों को कागजों पर काम करते हुए दर्ज किया गया, जबकि वास्तव में उन्हें महीनों से काम नहीं मिला था।
फर्जी हाजिरी और मजदूरी में गड़बड़ी के आरोप
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश और भाजपा शासित अन्य राज्यों से भी फर्जी हाजिरी और कथित 'क्लोन ऐप' घोटाले से संबंधित मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी अनियमितताओं के कारण वास्तविक मजदूरों को नुकसान हो सकता है और योजना के लाभ का दुरुपयोग हो सकता है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मजदूरों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों और संबंधित मीडिया रिपोर्ट में बताए गए मामलों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
इससे पहले भी कांग्रेस ने नई योजना को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी का आरोप है कि तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए जरूरतमंद लोगों को योजना से बाहर किए जाने और ग्राम पंचायतों की भूमिका कमजोर होने का खतरा है।
तमिलनाडु में 25 दिन अतिरिक्त रोजगार की घोषणा
इस राजनीतिक विवाद के बीच तमिलनाडु सरकार ने पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त रोजगार की घोषणा की है। राज्य सरकार के अनुसार, VB-G RAM G के तहत 125 दिनों का काम पूरा करने वाले पात्र परिवारों को राज्य के बजट से 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार दिया जाएगा। इस तरह पात्र परिवारों के लिए सालाना रोजगार की अवधि 150 दिनों तक पहुंच सकती है।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को प्रति वर्ष 150 दिनों तक काम उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त रोजगार के लिए राज्य सरकार अपने कोष से भुगतान करेगी।
किन परिवारों को मिलेगी प्राथमिकता?
तमिलनाडु सरकार ने अतिरिक्त 25 दिनों के रोजगार में कुछ श्रेणियों को प्राथमिकता देने की बात कही है। इनमें महिला मुखिया वाले परिवार, अकेली रहने वाली महिलाएं, दिव्यांग सदस्यों वाले परिवार, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवार तथा वन अधिकार कानून के तहत आने वाले पात्र लाभार्थी शामिल हैं।
इस फैसले से ग्रामीण रोजगार और मजदूरी भुगतान को लेकर जारी बहस के बीच राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। जहां कांग्रेस केंद्र की योजना पर सवाल उठा रही है, वहीं तमिलनाडु सरकार अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य संसाधनों का उपयोग करने की तैयारी में है।


