राजा भैया, बृजभूषण, धनंजय को कैसे मिले हथियारों के लाइसेंस? हाईकोर्ट ने 19 बाहुबलियों पर मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग, हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को लाइसेंस पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राजा भैया, धनंजय सिंह और बृजभूषण शरण सिंह समेत प्रदेश के 19 बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंसों पर रिपोर्ट मांगी है।

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को लाइसेंस जारी किए जाने और हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार तथा सभी जिलों के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है। साथ ही कोर्ट ने रघुराज प्रताप सिंह राजा भैय्या, धनंजय सिंह, बृजभूषण शरण सिंह जैसे 19 प्रभावशाली लोगों के शस्त्र लाइसेंस की जानकारी भी तलब की है।
सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करता है तथा यह कानून के शासन और सामाजिक शांति के विपरीत है।
अदालत ने कहा कि गृह विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा 20 मई 2026 को दाखिल हलफनामे से स्पष्ट हुआ है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के डीएम, पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समय-समय पर जारी सरकारी आदेशों तथा आर्म्स एक्ट, 1959 एवं उसके नियमों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि 23 मार्च 2026 के आदेश में लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और हस्तांतरण के मामलों में अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे।
दस लाख से ज्यादा जारी हुए लाइसेंस
कोर्ट के समक्ष रखे गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। विभिन्न श्रेणियों में 23,407 आवेदन लंबित हैं, जबकि डीएम के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपीलें मंडलायुक्तों के समक्ष लंबित हैं। इसके अलावा 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं तथा 6,062 मामलों में ऐसे लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं जिनके खिलाफ दो या अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लाइसेंस धारकों का जिला, थाना और नामवार विवरण प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि ऐसे लोगों के परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी हथियार लाइसेंस हैं या नहीं। अदालत ने कहा कि सुशासन और कानून के शासन के लिए प्रशासनिक कार्यवाही में निष्पक्षता और गैर-भेदभाव अनिवार्य है।
कोर्ट ने कहा कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों, जो व्यापक सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभाव रखते हैं, के संबंध में विवरण उपलब्ध नहीं कराया है। तथा ऐसे व्यक्तियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई हैं। स्थिति को स्पष्ट करने और किसी प्रकार की अस्पष्टता दूर करने के लिए आवश्यक है कि इनकी जानकारी भी दी जाए।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हथियारों का खुला प्रदर्शन प्रभुत्व और ताकत का भ्रम पैदा करता है, लेकिन इससे आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ती है। अदालत ने टिप्पणी की कि आत्मरक्षा के नाम पर हथियारों का प्रदर्शन सार्वजनिक स्थलों को डर और दबदबे के वातावरण में बदल देता है, जो शांतिपूर्ण समाज के लिए उचित नहीं है।कोर्ट ने आदेश की प्रति प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह), सभी जिलाधिकारियों तथा सभी पुलिस आयुक्तों और एसएसपी को भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिकारियों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर यह बताने को कहा गया है कि उन्होंने कोर्ट से कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं छिपाई है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी।
इनके बारे में मांगी जानकारी
कोर्ट ने रघुराज प्रताप सिंह राजा भैय्या, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेन्द्र सिंह गुड्डू,पप्पू भौकाली, इन्द्रदेव सिंह, सुनील यादव, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सनी सिंह, छुन्नू सिंह, तथा डॉ. उदय भान सिंह के बारे में जानकारी देने के लिए कहा है। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी इन व्यक्तियों के सही पते, आपराधिक मामलों, हथियार लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं।
कोर्ट ने पूछा- हथियारों का प्रदर्शन क्यों?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर भी सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कई जगहों पर लाइसेंसी हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन किया जाता है, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है। खासकर सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो और वीडियो डालने का ट्रेंड लगातार बढ़ा है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा है कि ऐसे मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई और लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था है।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कुछ चर्चित बाहुबलियों के नाम नहीं थे। इसी पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि जिन लोगों की छवि बाहुबली या अपराध से जुड़ी रही है, उनका रिकॉर्ड भी कोर्ट के सामने रखा जाए। इसके बाद कोर्ट ने अलग से 19 लोगों की सूची तैयार कर उनका पूरा आपराधिक इतिहास और लाइसेंस संबंधी जानकारी तलब कर ली।
सुरक्षा और लाइसेंस दोनों पर सवाल
हाईकोर्ट ने सिर्फ शस्त्र लाइसेंस ही नहीं, बल्कि इन बाहुबलियों को मिली सरकारी सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट जानना चाहता है कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर मुकदमे हैं, उन्हें सरकारी सुरक्षा किस आधार पर दी गई। साथ ही क्या सुरक्षा और हथियार दोनों साथ होने से कानून व्यवस्था पर असर पड़ता है?
क्या अब रद्द हो सकते हैं लाइसेंस?
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के शस्त्र लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जांच में नियमों के उल्लंघन या गलत जानकारी देकर लाइसेंस लेने की बात सामने आती है तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। हालांकि अंतिम फैसला कोर्ट और प्रशासनिक जांच पर निर्भर करेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस विभाग और सभी जिलों के अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है।


