लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की तैयारी, अमेरिकी न्याय विभाग ने जताई मंशा
अमेरिकी न्याय विभाग ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग करने की पुष्टि की है। हालांकि, भारत में लंबित मामलों के चलते प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

अमेरिकी जांच के दायरे में अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क
कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्थित अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के जनसंपर्क अधिकारी सियारन मैकएवॉय ने कहा कि बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग की जाएगी। यह बयान अमेरिकी न्याय विभाग के हालिया अभियान “ऑपरेशन हार्डबॉल” के बाद आया है, जिसके तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
अमेरिकी आरोप-पत्र में बिश्नोई, उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ तथा अन्य कथित गैंग सरगनाओं के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियां उन पर सीमा-पार संगठित अपराध गतिविधियों में संलिप्तता के आरोपों की पड़ताल कर रही हैं। एफबीआई ने गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मददगार सूचना देने वालों के लिए इनाम की भी घोषणा की है।
लंबी हो सकती है प्रत्यर्पण प्रक्रिया
भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण 1997 की द्विपक्षीय संधि तथा भारतीय प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 के तहत होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि बिश्नोई भारतीय जेल में बंद है और उस पर कई मुकदमे चल रहे हैं, इसलिए भारत पहले घरेलू मामलों के निपटारे को प्राथमिकता दे सकता है।
प्रक्रिया के तहत अमेरिकी न्याय विभाग औपचारिक अनुरोध तैयार करेगा, जिसे अमेरिकी विदेश विभाग भारत के विदेश मंत्रालय को भेजेगा। इसके बाद गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियां संधि और भारतीय कानूनों के अनुरूप उसकी समीक्षा करेंगी।
अधिकारियों का मानना है कि कानूनी औपचारिकताओं के कारण इस पूरी प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है। फिलहाल अमेरिकी पक्ष ने औपचारिक अनुरोध भेजने की समयसीमा स्पष्ट नहीं की है।


