रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ेगा भारी? अमेरिकी सीनेट ने पास किया नया बिल, 100% टैरिफ का प्रावधान
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका ने दबाव बढ़ाया है। अमेरिकी सीनेट ने नए Russia Sanctions Bill को मंजूरी दी है, जिसमें 100% तक टैरिफ का प्रावधान है।

86-11 के वोट से पास हुआ बिल
अमेरिकी सीनेट में रूस से जुड़े प्रतिबंधों वाले इस बिल को 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया गया। इसका उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, जो रूस से ऊर्जा और अन्य उत्पाद खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देते हैं।
हालांकि, बिल के पारित होने का यह मतलब नहीं है कि भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। यह प्रावधान भविष्य में अमेरिकी प्रशासन को रूस के प्रमुख खरीदार देशों के खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति देता है।
पहले 500% टैरिफ का था प्रस्ताव
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई पहले और भी कठोर थी। अप्रैल 2025 में सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल की ओर से पेश प्रस्ताव में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी।
बाद में प्रस्ताव में बदलाव किया गया और रूस के कच्चे तेल तथा गैस के शीर्ष पांच खरीदार देशों पर अधिकतम टैरिफ की सीमा 100 प्रतिशत निर्धारित की गई।
भारत पर क्यों है नजर?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई, जिससे उसे अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी कीमतों पर ऊर्जा की जरूरत पूरी करने में मदद मिली।
ऐसे में नए अमेरिकी प्रावधान से भारत के लिए संभावित आर्थिक और व्यापारिक प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन भारत पर इस प्रावधान का इस्तेमाल करेगा या नहीं।
किन देशों पर पड़ सकता है असर?
रूस के प्रमुख तेल खरीदारों में भारत और चीन के अलावा कुछ यूरोपीय देश भी शामिल हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ देशों को शर्तों के आधार पर राहत मिलने की संभावना बताई गई है। खासतौर पर वे देश जो रूसी गैस पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं, उन्हें संभावित छूट मिल सकती है।
ट्रंप को भी मिलेगी अतिरिक्त शक्ति
प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से अमेरिका आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाने की अतिरिक्त शक्ति देने का प्रावधान भी बताया गया है। इसके अलावा ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने और उसके साथ कारोबार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल है।
भारत के लिए आगे क्या चुनौती?
सीनेट की मंजूरी के बाद अब निगाहें आगे की विधायी प्रक्रिया और अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर हैं। भारत के लिए मुख्य चिंता यह होगी कि रूस से तेल खरीद जारी रखने की स्थिति में अमेरिकी व्यापार नीति का असर भारतीय कंपनियों, निर्यात और ऊर्जा लागत पर कितना पड़ता है। फिलहाल 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान संभावित कार्रवाई का हिस्सा है, तत्काल लागू शुल्क नहीं।


