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चाबहार पोर्ट समेत ईरान के 90 ठिकानों पर अमेरिका की बमबारी, 3 लोग मरे; ईरान ने किया पलटवार

अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म! ट्रंप के आदेश पर चाबहार पोर्ट सहित ईरान के 90 ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी। जवाब में ईरान ने कुवैत-बहरीन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाया। कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी।

चाबहार पोर्ट समेत ईरान के  90 ठिकानों पर अमेरिका की बमबारी, 3 लोग मरे; ईरान ने किया पलटवार
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तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है। अप्रैल में हुए सीजफायर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खत्म घोषित किए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं। गुरुवार को ईरान के दक्षिण-पूर्वी और सामरिक रूप से अहम चाबहार पोर्ट को निशाना बनाते हुए अमेरिका ने ताबड़तोड़ बमबारी की।

अमेरिकी सेना ने करीब 90 ईरानी ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है। वहीं, अमेरिका को करारा जवाब देते हुए ईरान ने भी कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार दूसरे दिन हमले किए हैं। इस तनाव के बीच कुवैत में मिसाइल और ड्रोन हमलों का अलर्ट भी जारी किया गया है।

चाबहार में भीषण धमाके और ब्लैकआउट

चाबहार में कई जोरदार धमाकों की खबर है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, शहर के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर बिजली गुल हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई धमाकों की आवाजें सुनीं, जिसके बाद इमरजेंसी सर्विस की टीमों को प्रभावित इलाकों की ओर दौड़ते देखा गया। अप्रैल में सीजफायर की घोषणा के बाद इस रणनीतिक बंदरगाह पर यह पहला हमला है। इसके अलावा, ईरान के गोलेस्तान प्रांत में अक टेकेह खान रेलवे ब्रिज पर भी मिसाइलें दागी गई हैं।

चाबहार पोर्ट का भारत के लिए महत्व

ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक, दोनों नजरियों से बेहद अहम है। यह ईरान का एकमात्र डीप-वाटर पोर्ट है, जिसकी पहुंच सीधे हिंद महासागर तक है। भारत के लिए इसकी सबसे बड़ी अहमियत यह है कि यह पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान, रूस और मध्य एशिया तक व्यापार का एक नया और छोटा रास्ता देता है। चाबहार पोर्ट की मदद से भारत को इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) तक पहुंच मिलती है, जो भारत के यूरेशियाई विजन का प्रमुख हिस्सा है।

इसके अलावा, रणनीतिक रूप से यह बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज 170 किलोमीटर दूर है, जिसे चीन विकसित कर रहा है। ऐसे में चाबहार पोर्ट अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव (CPEC) को संतुलित करने के लिए भारत का एक मजबूत जवाब भी है। हाल ही में भारत ने इस बंदरगाह और इससे जुड़े चाबहार-जाहेदान रेलवे लिंक के विकास कार्यों में तेजी लाई है, जो इसे भारत की कूटनीतिक और आर्थिक ताकत का बड़ा केंद्र बनाता है। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।

अमेरिका ने क्यों किया हमला?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन में उन समुद्री बुनियादी ढांचों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में ईरान की मदद करते हैं। अमेरिकी सेना की मिडिल ईस्ट कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि ताजा हमलों में उसने करीब 90 ईरानी ठिकानों को तबाह कर दिया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में जहाज घाट, एक समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर और आस-पास के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, नागरिक बंदरगाह सुविधाओं और महत्वपूर्ण एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान से बचाया गया है।

हमले की असल वजह क्या है?

अमेरिका ने यह ताजा कार्रवाई मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन कार्गो जहाजों पर हुए हमले के बाद की है। अमेरिका ने इस हमले का दोष ईरान पर मढ़ा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने इस अहम समुद्री मार्ग पर कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना जारी रखा, तो अमेरिका के हमले और भी भयानक हो जाएंगे।

ट्रंप के तल्ख तेवर: 'हम बहुत जल्दी जीतेंगे'

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की तुलना में उसे कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। ताजा हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, हमने उन पर बहुत जोरदार प्रहार किया है, मैं कहूंगा कि हमने 1 के मुकाबले 20 का वार किया है। ट्रंप ने आगे कहा कि हर बार जब वे हम पर हमला करेंगे, तो हम उन्हें 20 गुना ज्यादा मारेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहा है? ट्रंप ने जवाब दिया, मुझे नहीं पता, लेकिन अगर ऐसा हुआ तो हम इसे बहुत जल्दी जीत लेंगे। ट्रंप ने दावा किया कि वाशिंगटन सैन्य रूप से जीत चुका है। ईरान के पास अब बहुत कम बचा है और वह बुरी तरह एक समझौता चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि असल समस्या यह है कि मुझे नहीं लगता वे किसी समझौते का सम्मान करेंगे।

ईरान का पलटवार और चेतावनी

दूसरी तरफ, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। कुवैत सेना ने बताया कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव है और देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए हैं। उधर, ईरान के संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने 'एक्स' पर पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका अभी भी यह नहीं सीख पाया है कि धौंस जमाना और वादे तोड़ना अब बिना कीमत चुकाए मुमकिन नहीं है।


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