ट्रंप और पेजेशकियन ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर, जानिए मसौदे की 14 बड़ी शर्तें
अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए। समझौते में युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम समेत 14 अहम शर्तें शामिल हैं।

वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शांति समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, समझौते पर अंतिम सहमति वर्साय पैलेस में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान बनी। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर चुके थे।
ईरान ने भी समझौते की पुष्टि की
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि अब सबसे बड़ी चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी। हालांकि औपचारिक प्रक्रियाओं और आगे की वार्ताओं के लिए जिनेवा में प्रस्तावित बैठक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी।
समझौते की प्रमुख शर्तें
समझौते के मसौदे में कुल 14 प्रमुख बिंदु शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य सैन्य टकराव समाप्त करना और आर्थिक सहयोग बढ़ाना है।
तत्काल युद्धविराम और सैन्य कार्रवाई पर रोक
दोनों देश और उनके सहयोगी सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान बंद करेंगे। भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई नहीं करने तथा संप्रभुता का सम्मान करने पर सहमति बनी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री व्यापार बहाल
अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा, जबकि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज पर सहमति
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की निवेश एवं सहायता योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए आवश्यक वित्तीय और बैंकिंग व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी।
प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया
अमेरिका ने चरणबद्ध तरीके से ईरान पर लगाए गए आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध समाप्त करने का आश्वासन दिया है। इसमें तेल निर्यात, बैंकिंग, बीमा और परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंध भी शामिल हैं।
परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी
ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में नष्ट किया जाएगा। अंतिम समझौते तक परमाणु कार्यक्रम का विस्तार भी नहीं किया जाएगा।
संयुक्त निगरानी तंत्र होगा स्थापित
समझौते के पालन और क्रियान्वयन की निगरानी के लिए दोनों देश एक संयुक्त कार्यकारी तंत्र बनाएंगे। भविष्य में होने वाले अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समर्थन देने की भी योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी, वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी और लंबे समय से चले आ रहे अमेरिका-ईरान तनाव में ऐतिहासिक कमी देखने को मिल सकती है।


