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ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका! फाइटर जेट और एंटी मिसाइल सिस्टम तैनात, इजरायल भी अलर्ट

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए पश्चिम एशिया में एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और फाइटर जेट्स की तैनाती तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एंटी-मिसाइल सिस्टम भी बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि इजरायल भी हालात पर नजर रखते हुए अलर्ट मोड में है।

ईरान पर हमले की तैयारी में अमेरिका! फाइटर जेट और एंटी मिसाइल सिस्टम तैनात, इजरायल भी अलर्ट
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में फिर से बड़े सैन्य टकराव की आशंका तेज हो गई है। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य जमावड़ा शुरू कर दिया है। इसी बीच इजरायल भी अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को अलर्ट मोड पर रखने की खबरें आ रही हैं। यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है जब ईरान में देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, मौतों के आंकड़ों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सवालों पर अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव चरम पर पहुंचा हुआ है।

ट्रंप ने फिर की सैन्य कार्रवाई की बात

गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस' नाम की एक पहल शुरू की, जिसे एक ऐसी “अंतरराष्ट्रीय संस्था” बताया गया जो “स्थिरता बढ़ाने” और संघर्ष से प्रभावित इलाकों में “स्थायी शांति” सुनिश्चित करने का मकसद रखती है। मगर इसके 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य बल इस्तेमाल करने की बात करने लगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौतों को लेकर बार-बार सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं।

उन्होंने यह दावा भी किया कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान को “हजारों लोगों” को फांसी देने की योजना रद्द करनी पड़ी। ट्रंप ने गुरुवार को फिर कहा कि उनकी धमकियों के बाद ईरान ने करीब 840 फांसी रोक दीं। हालांकि बाद में उन्होंने अपना लहजा कुछ नरम कर लिया।

USS Abraham Lincoln स्ट्राइक ग्रुप तैनाती की तैयारी

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक USS Abraham Lincoln की अगुवाई वाला एक एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर आने वाले दिनों में अरब सागर या फारस की खाड़ी के इलाके में दाखिल हो सकता है। इसे वॉशिंगटन की तरफ से तेहरान पर दबाव बढ़ाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी वजह ईरान में प्रदर्शनों पर “कड़ी कार्रवाई” बताई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस स्ट्राइक ग्रुप की अंतिम पुष्टि की गई लोकेशन तीन दिन पुरानी है। पहले यह साउथ चाइना सी में था, लेकिन ट्रंप के इसे पश्चिम की ओर मोड़ने के बाद यह इंडियन ओसियन क्षेत्र में दिखा। इसके बाद यह ओपन-सोर्स AIS (Automatic Identification System) फीड पर सार्वजनिक रूप से ट्रैक होना बंद हो गया। इस समूह में एक अटैक सबमरीन भी शामिल बताई गई है।

F-15E Strike Eagle पहले से पश्चिम एशिया में

अमेरिकी F-15E Strike Eagle फाइटर जेट्स पहले ही पश्चिम एशिया में तैनात हैं। ये उसी स्क्वाड्रन से हैं जिसे अप्रैल 2024 में इजरायल पर ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में तैनात किया गया था। US Central Command (CENTCOM) ने मंगलवार को X पर एक वीडियो/पोस्ट भी साझा किया, जिसमें एक विमान किसी अज्ञात बेस पर उतरता दिखाई दे रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक यह तैनाती एक बड़े री-डिप्लॉयमेंट का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें KC-135 एरियल रिफ्यूलर (हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर) भी शिफ्ट किए जा रहे हैं ताकि फाइटर जेट्स को मिड-एयर रिफ्यूलिंग किया जा सकें और उनका स्ट्राइक रेंज बढ़ जाए।

THAAD और Patriot जैसे एंटी-मिसाइल सिस्टम भी बढ़ाए जा रहे

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में एडिशनल एंटी-मिसाइल सिस्टम, खास तौर से THAAD और Patriot को भी तैनात किया जा रहा है। इसे खास तौर पर अमेरिकी सहयोगियों, जैसे इजरायल और कतर, में मजबूत किया जाना बताया गया।

प्रदर्शनों पर हिंसा और मौतें: आंकड़ों को लेकर विरोधाभास

यह पूरा सैन्य जमावड़ा ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन और हिंसा की खबरें आ रही हैं। एक रिपोर्ट में (अल जज़ीरा द्वारा ईरानी सरकारी मीडिया नेटवर्क के हवाले से) कहा गया कि 3,117 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 2,427 नागरिक और सुरक्षा बल शामिल बताए गए। वहीं मानवाधिकार समूहों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, संभवतः 20,000 से ऊपर। ट्रंप ने इन मौतों को लेकर ईरान पर कड़ा रुख अपनाते हुए सैन्य कार्रवाई की धमकी फिर से दोहराई है। उन्होंने पहले यह भी कहा था कि ईरान “धरती से मिट जाएगा।”

ईरान की प्रतिक्रिया: ‘ट्रिगर पर उंगली' और अमेरिका-इजरायल पर आरोप

ईरान ने भी सख्त संदेश दिए हैं, उसने कहा कि उसकी “उंगली ट्रिगर पर” है और ट्रंप को धमकी भी दी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया और इसे कायराना करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह “12-दिवसीय युद्ध” में हार का बदला है। यह संकेत जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों की ओर था।

क्यों बढ़ रहा तनाव: 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का ‘लापता' होना

रिपोर्ट में एक और बड़ा कारण बताया गया है, ईरान के पास मौजूद 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (जिसे 10 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त बताया गया) का जून 2025 में अमेरिकी “बंकर बस्टर” हमलों के बाद लापता होना है। ट्रंप कह चुके हैं कि अगर तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम फिर शुरू किया तो अमेरिका कार्रवाई करेगा। उनका बयान था कि अगर वे कोशिश करेंगे… तो उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ेगा, लेकिन हम वहां भी उन्हें निशाना बनाएंगे।

इजरायल की भूमिका: ‘सेकेंडरी टारगेट' और एयर डिफेंस अलर्ट

अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो इजरायल एक अहम खिलाड़ी बन सकता है। चाहे वह सीधे शामिल हो या नहीं. वजह यह कि ईरान की नजर में इजरायल एक “स्वीकार्य सेकेंडरी टारगेट” हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायल का मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम Iron Dome और Arrow क्षेत्र में नुकसान सीमित करने और अमेरिका को प्रतिक्रिया का समय देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि इजरायल अगर अमेरिकी हमले में सीधे शामिल होता है तो उसके लिए जोखिम बढ़ेंगे, क्योंकि वह पहले से गाज़ा में संघर्ष में उलझा है। अमेरिका के साथ मिलकर हमला करने से बहु-फ्रंट युद्ध का खतरा बढ़ सकता है, जिसे वह अमेरिकी समर्थन के बावजूद संभालने में मुश्किल महसूस कर सकता है।


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