ईरान युद्ध पर ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने सैन्य कार्रवाई सीमित करने का प्रस्ताव किया पारित
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने वाले वॉर पावर्स प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कुछ रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन से पारित इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

मतदान के नतीजे सामने आते ही सदन में मौजूद कई सांसदों ने इसका स्वागत किया। डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा कि लंबे समय से जारी यह संघर्ष अमेरिका के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हुआ है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध और उससे जुड़ी गतिविधियों पर अमेरिकी करदाताओं के 100 अरब डॉलर से अधिक खर्च हो चुके हैं, जबकि इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
चौथी कोशिश में मिली सफलता
प्रतिनिधि सभा में ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों को सीमित करने की यह चौथी कोशिश थी। इससे पहले ऐसे प्रस्ताव पेश किए गए थे, लेकिन उन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था। इस बार कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिससे प्रस्ताव पारित हो गया।
इससे पहले अमेरिकी सीनेट में भी इसी प्रकार के प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा चुका है। अब यह मुद्दा फिर से सीनेट में चर्चा का विषय बनेगा, जहां इसके भविष्य को लेकर फैसला होगा।
ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन नेतृत्व का विरोध
हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के प्रयास कर रहा है।
जॉनसन के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है। यह क्षेत्र दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
विदेश मंत्री की चेतावनी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि कांग्रेस सैन्य कार्रवाई पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाती है तो ईरान इसे अमेरिकी प्रशासन की कमजोरी के रूप में देख सकता है। इससे भविष्य में कूटनीतिक वार्ताओं और सुरक्षा रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है।
रूबियो ने चेतावनी दी कि इस तरह के राजनीतिक संकेत विरोधी देशों को गलत संदेश दे सकते हैं और अमेरिकी प्रभाव को कमजोर कर सकते हैं।
क्या युद्ध थमने की दिशा में बढ़ेगा अमेरिका?
हालांकि यह प्रस्ताव तत्काल किसी सैन्य अभियान को समाप्त नहीं करता, लेकिन इसे ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के खिलाफ कांग्रेस का एक मजबूत राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका में युद्ध संबंधी निर्णयों पर राष्ट्रपति और कांग्रेस के अधिकारों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है।
अब सभी की निगाहें सीनेट पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी। यदि इसे व्यापक समर्थन मिलता है तो अमेरिका की ईरान नीति और पश्चिम एशिया में उसकी रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।


