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यूपी में अब जंजीर-फीते से नहीं होगी जमीन की पैमाइश और सीमांकन, योगी सरकार ने राजस्व सर्वे को बनाया हाईटेक

यूपी में जमीन की पैमाइश को हाईटेक बनाने के लिए योगी सरकार 504 GNSS रोवर का इस्तेमाल कर रही है। 350 तहसीलों में रोवर से सर्वे शुरू हो चुका है।

यूपी में अब जंजीर-फीते से नहीं होगी जमीन की पैमाइश और सीमांकन, योगी सरकार ने राजस्व सर्वे को बनाया हाईटेक
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भूमि सर्वेक्षण और सीमांकन की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व विभाग अब जीएनएसएस रोवर तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। प्रदेश में उपलब्ध 504 रोवर में से 350 को तहसीलों तक पहुंचाया जा चुका है और इनके जरिए जमीन से जुड़े फील्ड सर्वेक्षण का काम शुरू हो गया है।

इसके अलावा 143 रोवर 10 शहरी स्थानीय निकायों यानी ULB की नक्शा परियोजनाओं में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हरदोई के चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र में भी दो रोवर लगाए गए हैं। वहीं लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए नौ रोवर के जरिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

जंजीर-फीते से सेंटीमीटर की सटीकता तक पहुंची पैमाइश

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा के अनुसार, जीएनएसएस रोवर की तैनाती का दायरा केवल तहसीलों तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल फील्ड सर्वेक्षण, शहरी नक्शा परियोजनाओं और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में किया जा रहा है।

जीएनएसएस रोवर उपग्रहों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन के किसी स्थान की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह करीब 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता से लोकेशन उपलब्ध करा सकता है। सर्वेक्षक भूमि की सीमा के महत्वपूर्ण बिंदुओं के डिजिटल कोऑर्डिनेट दर्ज करते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर के जरिए दूरी, क्षेत्रफल और डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है।

धारा-24 महाअभियान से अब डिजिटल सर्वे तक

जमीन की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए राजस्व विभाग ने 1 जुलाई से 15 अगस्त तक धारा-24 विशेष महाअभियान चलाया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की शुरुआत की थी।

अभियान को एक समान तरीके से लागू करने के लिए विभाग की ओर से SOP भी जारी की गई। अब इसी प्रक्रिया को आधुनिक सर्वे तकनीक से जोड़ने से भूमि सीमांकन और पैमाइश के काम को अधिक तेज और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।

मानवीय चूक घटेगी, समय और लागत की भी होगी बचत

पारंपरिक तरीके से जमीन की पैमाइश में जंजीर और फीते का इस्तेमाल होता रहा है। इसमें अधिक समय लगने के साथ मानवीय गलती की संभावना भी बनी रहती है। रोवर तकनीक में सीमा के प्रमुख बिंदुओं को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे दूरी और क्षेत्रफल की गणना अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकती है।

डिजिटल निर्देशांकों को GIS और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे डेटा को सुरक्षित रखने, उसकी गुणवत्ता जांचने और जरूरत पड़ने पर दोबारा इस्तेमाल करने में आसानी होगी। बड़े भूमि सर्वेक्षण और नक्शा परियोजनाओं में इससे समय और लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है।

फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना होगी पैमाइश

कृषि भूमि की पैमाइश के दौरान खेतों में बार-बार आवाजाही से फसलों को नुकसान होने की आशंका रहती है। रोवर तकनीक में आवश्यक सीमा बिंदुओं के डिजिटल कोऑर्डिनेट दर्ज किए जा सकते हैं, जिससे खेत में अनावश्यक आवाजाही कम होगी। इससे किसानों के लिए भी सीमांकन और पैमाइश की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सुविधाजनक हो सकती है।

डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता

रोवर से तैयार डेटा को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और नक्शा प्रणालियों से जोड़ने पर रिकॉर्ड की ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता जांचने में मदद मिलेगी। भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कडास्ट्रल मैपिंग और GIS आधारित मैपिंग में इसका इस्तेमाल राजस्व प्रशासन को तकनीकी रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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