यूपी पंचायत चुनाव में देरी के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला, जिला पंचायत अध्यक्षों को सौंपी गई जिम्मेदारी
यूपी सरकार ने पंचायत चुनावों में देरी के बीच जिला पंचायत अध्यक्षों को अंतरिम प्रशासक नियुक्त किया है। ब्लॉक प्रमुखों के लिए भी जल्द इसी तरह का फैसला लिया जा सकता है।

कार्यकाल पूरा होने पर बनाई गई अंतरिम व्यवस्था
प्रदेश के सभी 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच वर्षीय कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो गया। प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने यह कदम उठाया है। पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव पर शासन स्तर से आदेश जारी किए गए हैं।
ब्लॉक प्रमुखों के लिए भी हो सकता है फैसला
सरकारी सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र पंचायतों के लिए भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू की जा सकती है। ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है, ऐसे में उनके लिए भी अंतरिम प्रबंध की घोषणा जल्द की जा सकती है। इससे स्थानीय निकायों के नियमित कार्यों और विकास योजनाओं के संचालन में व्यवधान नहीं आएगा।
ग्राम पंचायतों में पहले ही लागू हो चुकी है व्यवस्था
इससे पहले ग्राम पंचायतों में प्रधानों के कार्यकाल की समाप्ति के बाद उन्हें सीमित अवधि के लिए प्रशासकीय दायित्व सौंपे गए थे। सरकार का कहना है कि यह कदम चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
हाईकोर्ट में चल रही है सुनवाई
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के निर्णय को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई जारी है। अदालत ने सरकार से इस संबंध में कानूनी आधार और पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। न्यायालय ने संबंधित कानूनी प्रावधानों की वैधता पर भी विचार करने की आवश्यकता जताई है।
राज्य सरकार की ओर से पंचायत चुनावों की तिथियों को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में स्थानीय निकायों में यह अंतरिम व्यवस्था फिलहाल प्रशासनिक स्थिरता का आधार बनी हुई है।


