यूपी में ब्लॉक प्रमुख बने प्रशासक, सरकार ने जारी किया आदेश; नए चुनाव तक संभालेंगे जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त किया। पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए चुनाव तक रूटीन प्रशासनिक कार्य करेंगे, नीतिगत फैसलों पर रहेगी रोक।

प्रदेश के सभी ब्लॉक प्रमुखों और क्षेत्र पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो गया। इसके बाद प्रशासनिक कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए सरकार ने अंतरिम व्यवस्था लागू करते हुए वर्तमान ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासकीय जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है।
विकास कार्यों पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार का कहना है कि प्रशासक नियुक्त किए जाने से क्षेत्र पंचायतों के विकास कार्य, वित्तीय स्वीकृतियां और दैनिक प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी। पहले से स्वीकृत योजनाओं और नियमित विकास कार्यों का संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति बनी रहे।
अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था केवल तब तक लागू रहेगी, जब तक नई क्षेत्र पंचायतों का गठन और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
रूटीन कार्यों तक सीमित रहेंगे अधिकार
प्रशासक बनाए गए ब्लॉक प्रमुख केवल नियमित और आवश्यक प्रशासनिक कार्यों का ही निष्पादन कर सकेंगे। उन्हें किसी भी प्रकार का बड़ा नीतिगत निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी महत्वपूर्ण नीति या नए प्रस्ताव से जुड़ा मामला सामने आता है तो उसे संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) के माध्यम से शासन को भेजना होगा। अंतिम निर्णय राज्य सरकार स्तर पर ही लिया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना और कानूनी जटिलताओं से बचना बताया गया है।
जल्द जारी होगी विस्तृत गाइडलाइन
सरकार ब्लॉक प्रमुखों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी करेगी। इसमें स्पष्ट किया जाएगा कि प्रशासक के रूप में वे कौन-कौन से कार्य स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे और किन मामलों में उन्हें जिलाधिकारी या शासन की अनुमति आवश्यक होगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस गाइडलाइन से क्षेत्र पंचायतों के संचालन में पारदर्शिता बनी रहेगी और अधिकारों को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा।
चुनाव तक लागू रहेगी अंतरिम व्यवस्था
प्रदेश में क्षेत्र पंचायतों के नए चुनाव संपन्न होने तक यही अंतरिम व्यवस्था प्रभावी रहेगी। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय निकायों के प्रशासनिक कार्य बाधित न हों और ग्रामीण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर जारी रहे। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद नई निर्वाचित क्षेत्र पंचायतों के गठन के साथ ही प्रशासक व्यवस्था स्वतः समाप्त हो जाएगी।


