यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईस्टर पर 32 घंटे का युद्धविराम, पुतिन का बड़ा ऐलान
रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईस्टर के मौके पर 32 घंटे के अस्थायी युद्धविराम का आदेश दिया है, जो शनिवार शाम से लागू होगा। यह कदम जेलेंस्की की अपील के बाद आया, जिसमें उन्होंने ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की मांग की थी।

क्रेमलिन के अनुसार यह रोक शनिवार शाम चार बजे से शुरू होगी और रविवार के अंत तक चलेगी। इस दौरान सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की उस अपील के बाद आया है जिसमें उन्होंने ईस्टर के दौरान हमलों को रोकने की बात कही थी। जेलेंस्की ने विशेष रूप से कहा था कि इस अवधि में कम से कम ऊर्जा (पावर) से जुड़ी सुविधाओं पर हमला न किया जाए। उन्होंने यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से आगे बढ़ाया था, जो दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
रूस का फैसला क्या अलग है?
बता दें कि रूस ने जो युद्धविराम घोषित किया है, वह यूक्रेन की मांग से थोड़ा आगे है। क्रेमलिन ने कहा है कि उनकी सेना को पूरी तरह से सभी दिशाओं में लड़ाई रोकने का आदेश दिया गया है। हालांकि साथ ही यह भी कहा गया है कि सैनिक किसी भी उकसावे की स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार रहें। क्रेमलिन ने उम्मीद जताई है कि यूक्रेन भी इसी तरह युद्ध रोकने का पालन करेगा। लेकिन खबर लिखे जाने तक कीव की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
पहले भी ऐसा हो चुका है
यह पहली बार नहीं है जब ईस्टर या किसी त्योहार के समय अस्थायी युद्धविराम की घोषणा हुई हो। पिछले साल भी इसी तरह करीब 30 घंटे का युद्धविराम घोषित किया गया था, लेकिन वह जल्दी ही टूट गया था। उस समय दोनों देशों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाए थे।
शांति की कोशिशें क्यों अटकी हैं?
पश्चिमी देशों की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ताओं में अभी तक कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है। अमेरिका और यूक्रेन ने 30 दिनों के लंबे युद्धविराम का सुझाव दिया था, लेकिन रूस ने इसे स्वीकार नहीं किया। रूस का कहना है कि किसी भी स्थायी शांति समझौते के लिए पूरे संघर्ष का व्यापक समाधान जरूरी है, सिर्फ अस्थायी रोक नहीं। गौरतलब है कि युद्ध लगभग 800 मील लंबे मोर्चे पर जारी है। किसी भी पक्ष को निर्णायक बढ़त नहीं मिली है। बातचीत की कोशिशें भी फिलहाल रुकी हुई हैं और संघर्ष जारी है। यह ईस्टर युद्धविराम कितना प्रभावी होगा, यह अभी साफ नहीं है। पिछले अनुभवों को देखते हुए यह भी संभव है कि यह रोक बहुत लंबे समय तक न टिके।


