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होर्मुज जलडमरूमध्य पर शुल्क लगाने के संकेत, ट्रंप बोले- अमेरिका की सुरक्षा सेवाओं की कीमत चुकानी होगी

डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ अंतिम समझौता न होने पर अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगा सकता है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारी तेज।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर शुल्क लगाने के संकेत, ट्रंप बोले- अमेरिका की सुरक्षा सेवाओं की कीमत चुकानी होगी
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वाशिंगटनपश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक हलचलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान के साथ अंतिम और स्थायी समझौता नहीं हो पाता है, तो अमेरिका भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। उनका कहना है कि यह शुल्क क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिका द्वारा निभाई जा रही “संरक्षक की भूमिका” की लागत की भरपाई के लिए होगा।

60 दिन तक नहीं लगेगा कोई शुल्क

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जारी बयान में स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) के तहत लागू 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान किसी भी जहाज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समझौते के पूर्ण रूप से लागू होने तक भी यह व्यवस्था जारी रह सकती है।

हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि वार्ता विफल होती है और स्थायी समझौता नहीं बन पाता, तो अमेरिका होर्मुज मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने का विकल्प अपना सकता है।

ईरान समझौते पर बढ़ा राजनीतिक विवाद

ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं और कई विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर शुल्क लगाने की बात वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है।

कुछ आलोचकों का यह भी कहना है कि वर्तमान समझौता केवल 60 दिनों के लिए शुल्क-मुक्त आवाजाही की गारंटी देता है और इसके बाद की स्थिति को लेकर स्पष्टता नहीं है।

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

इस बीच पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार लेबनान में बढ़े संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्रीय हालात और समझौते के पालन को लेकर उनकी निगरानी जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा या शुल्क व्यवस्था का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

स्विट्जरलैंड में तेज हुई कूटनीतिक गतिविधियां

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु और सुरक्षा समझौते को लेकर स्विट्जरलैंड में कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ पहले ही वहां पहुंच चुके हैं, जबकि वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर भी वार्ता की तैयारियों में जुटे हैं।

सूत्रों के अनुसार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के भी स्विट्जरलैंड पहुंचने की संभावना है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


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