टीएमसी के 20 बागी सांसद अब संसद में अलग बैठेंगे, एनसीपीआई ने किया विलय का ऐलान; बोले- अब एनडीए के साथ
टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय के बाद लोकसभा में अलग सीटें आवंटित की गईं। पार्टी ने एनडीए के साथ रहने का ऐलान किया और मॉनसून सत्र की रणनीति तय की।

मॉनसून सत्र से पहले हुई अहम बैठक
विलय की घोषणा के बाद रविवार को संसद भवन में एनसीपीआई संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संसदीय दल के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने की। इस दौरान मॉनसून सत्र की रणनीति, विभिन्न विधेयकों पर पार्टी का रुख और एनडीए के साथ समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने सभी 20 सांसदों को अलग सीटें आवंटित कर दी हैं। उन्होंने कहा कि इससे पार्टी की संसदीय पहचान को लेकर उठ रहे सवाल समाप्त हो गए हैं।
प्रधानमंत्री से मुलाकात का भी किया जिक्र
सुदीप बंदोपाध्याय ने बताया कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तृत मुलाकात हुई, जिसमें संसद के आगामी सत्र और विभिन्न संसदीय विषयों पर चर्चा हुई। उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने सहयोग का भरोसा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीपीआई मंगलवार को होने वाली एनडीए की बैठक में भी भाग लेगी।
'अब हम एनडीए के साथ'
एनसीपीआई की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) डॉ. काकोली घोष ने कहा कि पार्टी अब औपचारिक रूप से एनडीए के साथ काम करेगी। उन्होंने बताया कि मॉनसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है और उन पर पार्टी का रुख तय करने के लिए विस्तृत चर्चा की गई है।
उन्होंने कहा कि संसद के भीतर पार्टी एक संगठित संसदीय दल के रूप में अपनी भूमिका निभाएगी।
20 सांसदों के विलय की आधिकारिक पुष्टि
एनसीपीआई ने जारी बयान में कहा कि टीएमसी से आए सभी 20 सांसद अब औपचारिक रूप से पार्टी का हिस्सा बन चुके हैं। पार्टी के अनुसार इस विलय से संगठन की जनसेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।
विलय करने वाले सांसदों में सुदीप बंदोपाध्याय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय, मिताली बाग, पार्थ भौमिक, दीपक देव अधिकारी, डॉ. शर्मिला सरकार, सयानी घोष, बापी हलदार, कालीपद सारेन, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, प्रसून बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, असित कुमार मल, यूसुफ पठान, जून मालिया, खलीलुर रहमान, मोहम्मद अबू ताहेर खान और रचना बनर्जी शामिल हैं।
राजनीतिक असर पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 20 सांसदों का यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद के मॉनसून सत्र में इन सांसदों की नई राजनीतिक भूमिका और एनडीए के साथ उनकी रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।


