टेक्सास में 90 फुट की हनुमान प्रतिमा पर विवाद, ‘गिरा देंगे’ पोस्ट से गरमाई बहस
टेक्सास के शुगर लैंड में 90 फुट की हनुमान प्रतिमा पर जेसी ह्यूजेस की ‘गिरा देंगे’ पोस्ट के बाद विवाद बढ़ गया है। हिंदू संगठनों और पूर्व अमेरिकी सैनिक ने आपत्ति जताई।

वॉशिंगटन। अमेरिका के टेक्सास स्थित शुगर लैंड में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा इन दिनों धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक बहस के केंद्र में है। श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित इस प्रतिमा को लेकर विवाद उस समय फिर तेज हो गया, जब कंजर्वेटिव यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस ने सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि “जब हम जीतेंगे, तो हम इसे गिरा देंगे।” ह्यूजेस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके बयान में “हम” और “जीत” से उनका आशय क्या था।
‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ क्यों है खास?
शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में लगी इस प्रतिमा को ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। इसका उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा अगस्त 2024 में हुई थी। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, सेवा और एकता के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।
यह प्रतिमा करीब 90 फुट ऊंची और लगभग 90 टन वजनी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार इसे मंदिर समुदाय के सहयोग से तैयार किया गया है। इसे उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में भी बताया गया है।
पहले भी विरोध का सामना कर चुकी है प्रतिमा
प्रतिमा की स्थापना के बाद से ही इसे लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। कुछ ईसाई कंजर्वेटिव समूहों से जुड़े लोगों ने प्रतिमा को लेकर आपत्ति जताई थी। 2025 में टेक्सास के रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन की टिप्पणी को लेकर भी विवाद हुआ था। वहीं, एक स्थानीय चर्च समूह प्रतिमा के पास प्रार्थना के लिए पहुंचा था। चर्च से जुड़े एक पादरी ने बाद में कहा था कि उस आयोजन का उद्देश्य नफरत या नुकसान पहुंचाना नहीं था।
पूर्व अमेरिकी सैनिक ने जताई कड़ी आपत्ति
जेसी ह्यूजेस की पोस्ट के बाद अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने सेना में अलग-अलग धर्मों के लोगों के साथ सेवा की और धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव को अमेरिकी मूल्यों के अनुरूप नहीं माना।
बख्शी ने यह भी कहा कि किसी समुदाय के पूजा स्थल या धार्मिक प्रतीक को उसकी आस्था के कारण निशाना बनाने की बात धार्मिक स्वतंत्रता के सवाल खड़े करती है। उनकी प्रतिक्रिया को हिंदू-अमेरिकी संगठनों और समर्थकों का समर्थन मिला।
मिडटर्म चुनाव के बीच बढ़ी राजनीतिक बहस
यह विवाद अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले सामने आया है, ऐसे समय में जब इमिग्रेशन, धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक मुद्दे राजनीतिक चर्चा में प्रमुख हैं। टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की मौजूदगी भी बड़ी है और शुगर लैंड-ह्यूस्टन क्षेत्र में कई हिंदू धार्मिक संस्थान सक्रिय हैं।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में प्रतिमा को हटाने या गिराने की कोई आधिकारिक सरकारी कार्रवाई सामने नहीं आई है। विवाद मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट, धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानबाजी के स्तर पर है।


