अरावली पर एक्सपर्ट की हाई पावर्ड कमेटी बनाएंगे, अवैध खनन ना हो: सुप्रीम कोर्ट
अरावली खनन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है। कोर्ट ने कहा है कि सुनिश्चित किया जाए कि अरावली क्षेत्र में अवैध खनन ना हो। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों की हाई पावर्ड कमेटी बनाने की बात कही है। इस कमेटी में अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।

नई दिल्ली। अरावली पहाड़ियों की परिभाषा से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश आया है। कोर्ट ने कहा है कि सुनिश्चित करें अरावली क्षेत्र में अवैध खनन ना हो। अवैध खनन के परिणाम ऐसे होते हैं जिनको ठीक नहीं किया जा सकता। इस तरह की गतिविधियों के दूरगामी और गंभीर परिणाम होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया- ‘अरावली को लेकर अलग-अलग फील्ड के और डोमेन एक्सपर्ट की हाई पावर्ड कमेटी बनाएंगे। इस समिति में वैज्ञानिकों, पर्यावरण और वन क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।'
अरावली रेंज को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिए गए स्वतः संज्ञान पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अब इसको लेकर नई याचिका दायर नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से रिपोर्ट देने को कहा। सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह बाद इस मामले में अगली सुनवाई करेगा। कोर्ट ने हाई पावर कमेटी में शामिल होने वाले सदस्यों के नाम सुझाने को भी कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर नियम से संबंधित अपने पूर्व फैसले पर लगी रोक को आगे बढ़ाया। यह रोक उस फैसले पर है, जिसमें अरावली क्षेत्र में खनन पर 100 मीटर की सीमा तय की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों, जिनमें एमिकस क्यूरी भी शामिल हैं, से कहा है कि वे प्रस्तावित समिति के लिए अपने सुझाव और विशेषज्ञों के नाम अदालत के समक्ष पेश करें।
अदालत ने दोहराया कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों पर सीधा प्रभाव डालेगी। बता दें कि सीजेआई सूर्यकांत की बेंच अरावली मामले में संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जमीन से 100 मीटर या अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने के नियम पर रोक लगाई थी। लगातार चले रहे प्रदर्शन और विवाद के बीच कोर्ट ने यह फैसला दिया था। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट और कोर्ट की टिप्पणियों के गलत अर्थ निकले जा रहे हैं। इसे दूर करने के लिए स्पष्टीकरण की आवयश्कता है।
जानें क्या है अरावली विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को जारी आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन के आदेश दिए थे, जिससे पूरे देश में 100 मीटर की परिभाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के निर्देश देते हुए केंद्र और अरावली के चार राज्यों (राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा) को भी नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा था।
बता दें कि अरावली पर्वतमाला को लेकर होने वाला यह फैसला राजस्थान से लिए खास मायने रखता हैं, ऐसा इलिए क्योंकि इस पर्वत श्रृंखला का लगभग 80 प्रतिशत भूभाग राजस्थान में ही समाहित है।


