'आप अंडों से डरती हैं, स्वतंत्रता सेनानियों ने गोली खाईं थीं'; सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की मांग ठुकराई
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने पुलिस के सामने ऑनलाइन पेश होने की मांग खारिज करते हुए जांच में सहयोग करने को कहा।

नई दिल्ली।तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा को एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने पुलिस के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की उनकी मांग खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके वकील की ओर से अंडे फेंके जाने की आशंका जताए जाने पर कड़ी टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई की। उनके वकील ने दलील दी कि सांसद को पुलिस के सामने ऑनलाइन माध्यम से पेश होने की अनुमति दी जाए, क्योंकि उनके निर्वाचन क्षेत्र में पहले प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके जाने की धमकी दी गई थी।
अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति राजनीति में है तो क्या वह इस तरह की घटनाओं के डर से जांच में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने से बच सकता है। अदालत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों द्वारा झेले गए खतरों का उदाहरण देते हुए याचिका पर कड़ा रुख अपनाया।
क्या है महुआ मोइत्रा से जुड़ा मामला?
मामला जून में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। एक भाजपा नेता की शिकायत के आधार पर मोइत्रा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए दो वीडियो में आपत्तिजनक या भड़काऊ टिप्पणियां की थीं।
विवाद के दौरान कृष्णानगर में एक अदालत के बाहर कुछ भाजपा समर्थकों के अंडे और टमाटर लेकर जुटने की बात सामने आई थी। इसी घटना का हवाला देते हुए मोइत्रा की ओर से पुलिस स्टेशन जाने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई गई।
वकील ने बताई ‘भीड़ के हमले’ की आशंका
मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच अधिकारी के सामने पेश होने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि पिछली बार पुलिस स्टेशन जाने के दौरान उनके खिलाफ विरोध हुआ था और अंडे फेंके जाने की घटना भी हुई थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को पर्याप्त आधार नहीं माना और कहा कि पहले से जारी न्यायिक आदेश का पालन किया जाना चाहिए।
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पहले के आदेश का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने मोइत्रा को अंतरिम राहत देते हुए जांच में सहयोग करने और 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें किसी प्रकार की समस्या है तो उसका समाधान संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष रखा जा सकता है। शीर्ष अदालत के रुख के बाद मोइत्रा के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।


