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सीजेआई के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केरल कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को नोटिस; कहा- संयम को कमजोरी न समझें

CJI जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त। केरल कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को अवमानना का नोटिस, जानिए कोर्ट ने क्या कहा।

सीजेआई के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केरल कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को नोटिस; कहा- संयम को कमजोरी न समझें
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नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अदालत ने पूछा है कि संविधान के अनुच्छेद-139 के तहत उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस की माफी से संतुष्ट नहीं दिखा सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान केरलम कांग्रेस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि पार्टी इस मामले में हलफनामा दाखिल करेगी। उन्होंने दलील दी कि विवादित पोस्ट आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पदाधिकारियों की अनुमति के बिना प्रकाशित की गई थी। पार्टी ने अगले ही दिन प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बिना शर्त माफी मांगी और पोस्ट को हटा दिया था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। पीठ ने कहा कि नोटिस किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि केरलम कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों को जारी किया जा रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि वह जांच करेगी कि दाखिल किया जाने वाला हलफनामा केवल औपचारिकता है या उसमें वास्तव में पश्चाताप की भावना है।

संविधान सर्वोच्च, न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता नहीं

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणियां कीं। पीठ ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल इससे ऊपर नहीं हो सकता। न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अदालत ने साफ किया कि न्यायिक फैसलों की आलोचना करना अलग बात है, लेकिन न्यायपालिका के कामकाज में बाधा डालना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की ताकत राजनीतिक समर्थन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि कानून के शासन से आती है। पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा, "हम खुद पर नियंत्रण रखते हैं, इसे कमजोरी न समझा जाए।" अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने की छूट नहीं दी जा सकती।

12 अक्टूबर की पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद

यह मामला 12 अक्टूबर को केरल कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से की गई एक पोस्ट से जुड़ा है। आरोप है कि इस पोस्ट में CJI जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। पोस्ट सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

माफी की गंभीरता पर होगा फैसला

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केरलम कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत अब उनके हलफनामे और माफी की वास्तविकता का परीक्षण करेगी। इसके बाद ही अवमानना की कार्यवाही को लेकर अगला फैसला लिया जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक जवाबदेही और न्यायपालिका की गरिमा को लेकर बहस तेज कर दी है।


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