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NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- युवाओं का भरोसा टूटने नहीं देंगे, जिम्मेदारी तय करना जरूरी

NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने NTA से कड़े सवाल पूछे हैं। अदालत ने कहा कि युवाओं को निराश नहीं किया जा सकता और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना जरूरी है।

NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- युवाओं का भरोसा टूटने नहीं देंगे, जिम्मेदारी तय करना जरूरी
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नई दिल्ली। NEET-UG परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं को इस तरह निराश नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई चूक की जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पूर्व निर्देशों के अनुसार आवश्यक हलफनामा दाखिल कर दिया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने NTA और विशेषज्ञ समिति के कामकाज पर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए।

युवाओं के भविष्य से जुड़ा है मामला

सुनवाई के दौरान जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं और उनकी उम्मीदें इन परीक्षाओं पर टिकी होती हैं।

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि ऐसी घटनाएं छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डालती हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

NTA और विशेषज्ञ समिति से पूछे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब समिति पहले से सक्रिय थी और सुधार संबंधी सुझाव दिए जा चुके थे, तो फिर इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई।

पीठ ने कहा कि यदि उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों और निगरानी के बावजूद अनियमितताएं हुई हैं, तो या तो सिफारिशों में कमी थी या फिर उनके क्रियान्वयन की निगरानी पर्याप्त नहीं रही।

भविष्य की परीक्षा व्यवस्था पर मांगा रोडमैप

अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसमें यह बताया जाए कि भविष्य में परीक्षाओं को सुरक्षित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि NTA को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से इतना मजबूत बनाया जाना चाहिए कि भविष्य में 2024 और 2026 जैसी विवादित परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों। अदालत ने 2 जुलाई से पहले विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने साफ किया कि उसका उद्देश्य केवल मौजूदा मामले की जांच नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल करना भी है।

नीट यूजी 2026 के लिए क्या नए सुरक्षा इंतजाम किए गए?

एनटीए की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि नीट यूजी 2026 के लिए कई नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं ताकि पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं को रोका जा सके। इन उपायों में आधार आधारित जैविक पहचान सत्यापन, चेहरे की पहचान जांच, सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित गड़बड़ी पकड़ने वाली तकनीक और मोबाइल संकेत अवरोधक शामिल हैं। इसके अलावा प्रश्न पत्रों के परिवहन और सुरक्षित भंडारण के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। कई केंद्रों पर पुलिस तैनाती भी बढ़ाई गई है।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

एनटीए की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि दोबारा परीक्षा पूरी सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर बैठक हुई है और सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी सुरक्षा उपाय सार्वजनिक नहीं किए जा सकते, क्योंकि ऐसा करने से उनका मकसद कमजोर पड़ सकता है। तुषार मेहता ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक तंत्र तैयार किया जाएगा।


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