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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, 18 वर्ष से कम छात्रों की तत्काल रिहाई के निर्देश

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश। 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारी छात्रों की तत्काल रिहाई के निर्देश, केंद्र और सात राज्यों को नोटिस, निष्पक्ष जांच पर जोर।

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, 18 वर्ष से कम छात्रों की तत्काल रिहाई के निर्देश
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नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किए हैं। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ अनावश्यक दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत ने केंद्र सरकार और सात राज्यों को नोटिस जारी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया।

नाबालिग छात्रों की रिहाई और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों की आयु 18 वर्ष से कम है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों का गंभीर आपराधिक इतिहास है या जिन पर अलग प्रकृति के आपराधिक आरोप हैं, उनके मामलों पर कानून के अनुसार विचार होगा।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं ताकि जांच निष्पक्ष ढंग से हो सके। अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों का व्यक्तिगत डेटा और डिजिटल जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।

"लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन अधिकार"

सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग या कानून का उल्लंघन हुआ है तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सीजेआई ने कहा कि जिम्मेदारी तय किए बिना किसी जांच का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। अदालत ने संकेत दिया कि सरकारों का पक्ष सुनने के बाद इस पूरे मामले की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) गठित करने पर विचार किया जाएगा।

सुनवाई में बल प्रयोग के आरोपों का उठा मुद्दा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन और अन्य बल प्रयोग के कारण कई छात्र घायल हुए। कुछ मामलों में गंभीर चोटों और पत्रकारों पर कथित हमले का भी उल्लेख किया गया।

अदालत ने इन आरोपों पर कोई अंतिम टिप्पणी करने से पहले कहा कि सभी तथ्यों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।

सरकार ने रखी अपनी दलील

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार किसी भी प्रकार के अत्यधिक बल प्रयोग का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी घायल हुए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि यदि किसी अधिकारी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने इस पर कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि सभी पक्षों के तथ्य सामने आ सकें।

कई राज्यों की घटनाएं भी सुनवाई के दायरे में

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन और कार्रवाई से जुड़े मामले सामने आए हैं। बिहार से जुड़े पक्षकारों ने दावा किया कि कई नाबालिग अभी भी हिरासत में हैं और उन्हें शीघ्र रिहा किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट अब केंद्र और राज्यों के जवाब मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई करेगा। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए समान दिशा-निर्देश तैयार करने पर भी विचार किया जाएगा।


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