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झारखंड की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित धांधली और CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार, JPSC और JSSC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

झारखंड की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित धांधली और CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार, JPSC और JSSC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
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नई दिल्ली/ रांची। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता और पैसे लेकर अयोग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर हरिशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका दाखिल की है, जिसकी सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहनन की पीठ में हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में विभिन्न नियुक्तियों में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में कथित तौर पर पैसे का लेन-देन हुआ और अयोग्य अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाकर सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया। इस मामले में छात्र और अभ्यर्थी लंबे समय से सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि राज्य सरकार मामले की सीबीआई जांच कराने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी है। याचिका में राज्य सरकार, केंद्र सरकार, सीबीआई, सीआईडी, जेपीएससी और जेएसएसी को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि गड़बड़ी का दायरा केवल एक-दो नियुक्तियों तक सीमित नहीं है।

सीआईडी की जांच में गड़बड़ियों के मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार पहले ही 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द कर चुकी है। इसके अलावा छह नियुक्तियों की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की व्यापकता को देखते हुए केवल विभागीय या राज्य एजेंसी की जांच पर्याप्त नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सत्यम राजपूत ने दलीलें पेश कीं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी करने के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सामने आएगा।



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