राजनीतिक दलों के गुमनाम नकद चंदे पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, 2,000 रुपये की सीमा पर उठे सवाल
राजनीतिक दलों को मिलने वाले 2,000 रुपये से कम के गुमनाम नकद चंदे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका में आयकर अधिनियम की धारा 13ए को चुनौती दी गई है।

नई दिल्ली। राजनीतिक दलों को मिलने वाले गुमनाम नकद चंदे से जुड़े एक अहम मामले पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। मामला आयकर अधिनियम, 1961 के उस प्रावधान से जुड़ा है, जिसके तहत राजनीतिक दल 2,000 रुपये से कम की नकद राशि प्राप्त कर सकते हैं और ऐसे चंदे के लिए दानदाता की पहचान सार्वजनिक करने की बाध्यता नहीं होती। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे खत्म करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर सकती है। याचिका खेम सिंह भाटी की ओर से दायर की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले गुमनाम नकद चंदे से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित होती है।
गुमनाम चंदे से चुनावी पारदर्शिता पर असर का दावा
याचिकाकर्ता का कहना है कि जब राजनीतिक दलों को बिना दानदाता की पहचान बताए नकद राशि प्राप्त करने की अनुमति होती है, तो मतदाताओं के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि राजनीतिक दलों को पैसा कहां से मिल रहा है और इसके पीछे दानदाताओं के क्या हित या उद्देश्य हैं।
याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक फंडिंग की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जनता को राजनीतिक दलों की आर्थिक गतिविधियों और चंदे के स्रोत की पर्याप्त जानकारी मिल सके। याचिकाकर्ता ने गुमनाम नकद चंदे की व्यवस्था को चुनावी पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत बताया है।
आयकर अधिनियम की धारा 13ए को चुनौती
याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के खंड (डी) को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह निर्देश देने की मांग भी की है कि राजनीतिक दलों को किसी भी राशि का भुगतान करने वाले व्यक्ति का नाम और अन्य संबंधित विवरण सार्वजनिक किए जाएं।
इसके अलावा याचिका में राजनीतिक दलों के लिए नकद चंदा स्वीकार करने पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है। दलील है कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और चुनावी व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत होगा।
चुनावी बॉन्ड मामले के फैसले का दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के चुनावी बॉन्ड योजना से जुड़े फैसले का भी हवाला दिया है। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक चंदे से संबंधित व्यवस्था में मतदाताओं के सूचना के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राजनीतिक दलों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की मांग
याचिका में निर्वाचन आयोग को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की ओर से दाखिल किए जाने वाले फॉर्म 24ए में दर्ज चंदे से संबंधित जानकारी की जांच करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने उन राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जो दानदाताओं के पते, स्थायी खाता संख्या (PAN) और अन्य जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं कराते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि अदालत इस प्रावधान की संवैधानिकता और राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता से जुड़े तर्कों पर क्या रुख अपनाती है।


