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अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी- एमपी और राजस्थान सरकार को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को तत्काल प्रभाव से प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी ।

अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी- एमपी और राजस्थान सरकार को लगाई फटकार
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नई दिल्ली।चंबल घड़ियाल अभयारण्य में लगातार बढ़ रहे अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को तत्काल प्रभाव से प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी और खाली पड़े वन रक्षक पदों पर जल्द भर्ती करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में बिना नंबर और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से अवैध रेत ढुलाई की मीडिया रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर रिपोर्ट सही है तो अधिकारियों ने अदालत में गलत हलफनामा दाखिल किया है।

CCTV और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों को प्रभावित इलाकों में सीसीटीवी कैमरे, कंट्रोल सेंटर और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यह काम युद्ध स्तर पर किया जाए और छह महीने के भीतर सभी निगरानी व्यवस्था पूरी तरह चालू होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन वाहनों का इस्तेमाल अवैध खनन में हो रहा है, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। फर्जी नंबर प्लेट या बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को जब्त कर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

सिर्फ ड्राइवर नहीं, मालिकों पर भी होगी कार्रवाई

अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल वाहन चालक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अवैध खनन नेटवर्क से जुड़े वाहन मालिकों, ठेकेदारों और अन्य लोगों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वन विभाग के कर्मचारियों पर बढ़ते हमलों को लेकर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि फील्ड लेवल पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

स्थानीय लोगों के रोजगार पर भी जोर

कोर्ट ने राज्यों को यह भी सुझाव दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रोजगार योजनाएं और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किए जाएं। साथ ही स्थानीय समुदायों को संरक्षण, वृक्षारोपण, इको-टूरिज्म और निगरानी कार्यों से जोड़ने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में करेगा। इससे पहले अदालत ने 17 अप्रैल को भी अवैध रेत खनन को लेकर चिंता जताते हुए कहा था कि कोर्ट इस मामले में मूक दर्शक नहीं बना रह सकता।

चंबल अभयारण्य क्यों है खास?

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैला करीब 5400 वर्ग किलोमीटर का संरक्षित क्षेत्र है। यह दुर्लभ घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड क्राउन रूफ टर्टल जैसे संकटग्रस्त जीवों का घर माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगातार हो रहा अवैध खनन इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। इसी को देखते हुए अदालत ने तीनों राज्यों को सख्त और समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


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