सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जज बनने के लिए अब 3 नहीं, 1 साल की वकालत जरूरी; 2027 तक मिली विशेष राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज भर्ती के लिए वकालत के अनुभव की शर्त तीन साल से घटाकर एक साल कर दी है। 2027 तक फ्रेश उम्मीदवारों को भी विशेष राहत मिलेगी।

नई दिल्ली। देशभर के लॉ ग्रेजुएट्स और युवा वकीलों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) यानी एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए जरूरी कानूनी अनुभव की अवधि को तीन साल से घटाकर एक साल कर दिया है। यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए अहम माना जा रहा है, जो कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यायिक सेवा में करियर बनाना चाहते हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 2:1 के बहुमत से यह निर्णय दिया। अदालत ने अपने मई 2025 के फैसले में अनुभव से संबंधित व्यवस्था में बदलाव किया है।
2027 तक बिना अनुभव वाले उम्मीदवारों को भी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने अभ्यर्थियों के हित में एक अंतरिम व्यवस्था भी लागू की है। 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच अधिसूचित होने वाली न्यायिक सेवा परीक्षाओं में बिना पूर्व वकालत अनुभव वाले उम्मीदवारों को भी आवेदन करने की अनुमति दी जाएगी।
हालांकि, ऐसे उम्मीदवारों का चयन होने के बाद उन्हें सीधे न्यायिक पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। उन्हें पहले एक साल की ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। इसके बाद एक साल की स्ट्रक्चर्ड क्लर्कशिप का प्रावधान होगा। इस प्रक्रिया के जरिए उन्हें न्यायिक कामकाज और अदालत की व्यावहारिक प्रक्रिया का अनुभव देने की कोशिश की जाएगी।
1 अप्रैल 2027 से लागू होगा एक साल का अनुभव
अदालत के अनुसार, 1 अप्रैल 2027 के बाद जारी होने वाली न्यायिक सेवा भर्तियों में उम्मीदवारों के लिए कम से कम एक साल की वकालत का अनुभव अनिवार्य होगा। इस तरह तीन साल के अनुभव की पिछली शर्त को घटाकर एक साल किया गया है।
अचानक बदले नियम से युवाओं को हुई थी परेशानी
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि न्यायपालिका में प्रवेश से पहले कानून के व्यावहारिक अनुभव का महत्व है। हालांकि, अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि नियमों में अचानक बदलाव से लॉ ग्रेजुएट्स और युवा वकीलों के सामने कठिनाई पैदा हुई थी। इसी वजह से व्यवस्था में सीमित राहत देना जरूरी समझा गया।
मई 2025 में शीर्ष अदालत ने फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स के सीधे सिविल जज परीक्षा में शामिल होने पर रोक लगाते हुए तीन साल की वकालत को अनिवार्य किया था। बाद में इस फैसले को लेकर हाईकोर्ट्स, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज और लॉ कॉलेजों सहित विभिन्न पक्षों से राय मांगी गई।
अब संशोधित व्यवस्था के तहत न्यायिक सेवा में जाने वाले युवाओं के लिए अनुभव की अनिवार्यता अधिक व्यावहारिक बनाई गई है। इससे आने वाले वर्षों में न्यायिक सेवा परीक्षा, सिविल जज भर्ती और लॉ ग्रेजुएट के लिए अवसरों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।


